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Meerut: यूपी के मेरठ में ढह गया तीन मंजिला मकान, 11 लोग निकले गए 10 की अब तक हुई मौत; 4 की अभी तलाश जारी

Meerut Building Collapsed: यूपी के मेरठ में तीन मंजिला मकान गिरा। मलबे से 11 लोग निकले गए 10 की अब तक हुई मौत ; 4 की अभी तलाश जारी , मलवे में दबने से कई पशुओं की भी हुई मौत इसके लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

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मेरठ में गिरी तीन मंजिला इमारत।

UP News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में जर्जर हालत में तीन मंजिला मकान गिर गया। मेरठ के लिसाडी गेट थाना क्षेत्र में हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि जाकिर कॉलोनी में हुए इस हादसे में अभी तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लोगो की अभी तलाश जारी है , मलबे में दबने से कई पशुओं को भी मौत हो गई है क्योंकि इस मकान में सबसे नीचे पशुओं की डेरी थी जिसमें बताया जा रहा है कि दो दर्जन से ज्यादा पशु थे ,हालाकि अभी पशुओं की संख्या साफ नहीं है , बताया जा रहा है कि मकान के गिरने की वजह लगातार बारिश होना है। जानकारी के अनुसार, मकान जर्जर हालत में था बताया जा रहा है कि लगभग यह 35 साल पुराना मकान था, घटना के बाद तमाम पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और अभी तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है जो की रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी है।

बचाव अभियान चला रही है रेस्क्यू टीम

दरअसल हादसा मेरठ के लोहिया नगर थाना क्षेत्र के जाकिर कॉलोनी का है जहां शनिवार शाम एक तीन मंजिला( G+2) मकान भारभरा कर गिर गया , बताया जा रहा है की मरम्मत न होने के चलते मकान जर्जर हालत में हो गया था ,सूचना के बाद मेरठ की कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे ,एसएसपी विपिन ताडा , एडीजी डीके ठाकुर सहित अन्य अफसर भी मौके पर पहुंचे , मकान गिरने के बाद स्थानीय लोग भी पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ बचाव कार्य में लगे हैं लेकिन बारिश के चलते और लेटर के सरियों की वजह से काफी परेशानी आ रही है ,बताया जा रहा है कि मकान में रहने वाला परिवार डेरी चलता था , नीचे की मंजिल पर भैंस बंधी थी । मकान गिरने से परिवार के साथ-साथ पशु भी मालवे में दब गए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ लोगों को बचाया गया

रेस्क्यू ऑपरेशन पुराने शहर और पुराने इलाके की घनी आबादी क्षेत्र में है और रुक रुक कर लगातार बारिश भी हो रही है इसके कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है ,रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस ,दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीम लगी है साथ ही स्निफर डॉग्स को भी लगाया गया है। देर रात से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, बताया जा रहा है कि मकान एक विधवा महिला का था जो अपने बेटों के परिवार सहित यहां रहती है तीन मंजिला मकान में ग्राउंड फ्लोर पर दूध की डेरी चलती थी इसलिए कई भैंसे भी मालवे में दब गई है , स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मकान 90 साल की बुजुर्ग महिला नफ्फो का है यहां अपने दो बेटों के परिवार के साथ रहती थी। वही इस मामले पर मेरठ के जिलाधिकारी ने बताया कि परिजनों के अनुसार अब तक उन्होंने 15 लोग मालवे में दबे होना बताया था जिसमें से अब तक बच्चो सहित 11 लोगो को मलवे में से निकाला जा चुका है जिसमे 6 लोगो की मौत हो चुकी है और 4 लोगो की तलाश जारी है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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