Blue Drum Murder Case: मेरठ के चर्चित 'ब्लू ड्रम हत्याकांड' में मौत की सजा पाने वाले दोनों दोषियों मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है।उन्होंने निचली अदालत के फैसले को अवैध और मनमाना बताते हुए सभी आरोपों से बरी करने की मांग की है। हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच अगले हफ्ते इस मामले पर सुनवाई कर सकती है।
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान और साहिल की ओर से शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने अपील दाखिल की। वकील के मुताबिक, दोनों दोषियों ने उन्हें अपना अधिवक्ता नियुक्त करने की सहमति दी थी, जिसके बाद निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई।
अभियोजन के सबूतों पर उठाए सवाल
अपील में दोनों दोषियों ने दावा किया है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। उनका कहना है कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए अटकलों के आधार पर फैसला सुनाया। अपील में हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में कथित विरोधाभासों का भी जिक्र किया गया है। दोषियों ने दावा किया कि इन खरीदों की पुष्टि के लिए न तो सीसीटीवी फुटेज पेश की गई और न ही वैध खरीद रसीदें उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा, उन्होंने बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर नहीं होने, वीडियोग्राफी की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के लिए अनिवार्य प्रमाणपत्रों की कमी का मुद्दा भी उठाया है।
मार्च 2025 में हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में 3 मार्च 2025 को हुई सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। सौरभ पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी थे और मुस्कान के पति थे। आरोप था कि हत्या के बाद मुस्कान और साहिल ने शव को ठिकाने लगाने के लिए सीमेंट और कंक्रीट से भरे नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपा दिया था। पुलिस ने जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था। जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को हत्या और शव छिपाने के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। यह फैसला 126 सुनवाइयों और 13 महीने चले मुकदमे के बाद आया था।
