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भोपाल गैस त्रासदी पर वर्कशॉप आयोजित, NIDM और NDMA ने आपदा से निपटने के लिए की चर्चा

Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष पूरे होने पर एनआईडीएम और एनडीएमए ने एक कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में त्रासदी के दीर्घकालिक प्रभावों के साथ-साथ भारत में वर्तमान औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।

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वर्कशॉप के दौरान।

Photo : Times Now Digital

Bhopal Gas Tragedy: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने ‘भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष: सबक, चुनौती और संभावनाएं’ विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में से एक की स्मृति में न केवल उसके दीर्घकालिक प्रभावों पर चिंतन करना था, बल्कि भारत में वर्तमान औद्योगिक और रासायनिक सुरक्षा की स्थिति का आकलन करना भी था।

विभिन्न क्षेत्रों के लोग हुए शामिल

कार्यशाला में नीति निर्माताओं, सुरक्षा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, और उद्योग जगत के बड़े अनुभवी लोगों ने भाग लिया तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल, जोखिम न्यूनीकरण, और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों में पिछले चार दशकों में हुई प्रगति का विश्लेषण किया। इस आयोजन ने मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा हुई और सुरक्षित औद्योगिक भविष्य के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने का प्रयास किया गया।

मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित

कार्यशाला में मुख्य विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें भोपाल त्रासदी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, सुरक्षा नियमों पर इसका प्रभाव, भारत में नियामक और नीति ढांचे का विकास, खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया में तकनीकी प्रगति, और सामुदायिक भागीदारी तथा आपदा प्रतिरोधक क्षमता शामिल थे। रासायनिक पदार्थ के उद्योग में सुरक्षा प्रोटोकॉल को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

इस एक दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कृष्ण एस वत्स, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव दीपांकर अरोन, NIDM के कार्यकारी निदेशक राजेंद्र रत्नू, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के महानिदेशक अतुल गोयल, डीटीयू के कुलपति प्रतीक शर्मा समेत अन्य लोग शामिल हुए।

भविष्य की दिशा पर चर्चा

भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं वर्षगांठ पर, NIDM और NDMA द्वारा आयोजित कार्यशाला ने त्रासदी से सीखे गए सबक, चुनौतियां और भविष्य की दिशा पर चर्चा की। इस कार्यशाला का उद्देश्य आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए जरूरी उपायों पर ध्यान केंद्रित करना था।

Devshanker Chovdhary
Devshanker Chovdhary author

<p>देवशंकर चौधरी मार्च 2024 से Timesnowhindi.com के साथ करियर को आगे बढ़ा रहे हैं और बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। टाइम्स नाउ सिटी टीम में वह इंफ्रा, डेवलपमेंट, पॉलिटिक्स और लोगों से जुड़ी स्टोरी करते हैं। हर स्टोरी में अलग एंगल निकालने पर फोकस रहता है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं।&nbsp;बीते वर्षों में टेलीविजन और डिजिटल मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इससे पहले इन्होंने दैनिक जागरण, यूनीवार्ता, एबीपी न्यूज और रोहतास पत्रिका में काम किया है। दैनिक जागरण में रियल टाइम डेस्क पर काम कर चुके हैं, जहां वर्ल्ड अफेयर्स और नेशनल बीट की खबरें करते थे। यूनीवार्ता में नेशनल और विदेश डेस्क पर काम कर चुके हैं। एबीपी न्यूज में डिजिटल टीम का हिस्सा रह चुके हैं। रोहतास पत्रिका में काम करने के दौरान कोविड काल में बिहार के कई जिलों में घूम-घूम कर काम करने का अनुभव है। ग्रेजुएशन के दौरान ही पत्रकारिता से जुड़ गए थे, जिस दौरान दैनिक अखबारों के साथ काम किया है। अकाउंटिंग एंड मैनेजमेंट ऑनर्स में स्नातक और जनसंचार में स्नातकोत्तर हैं।</p>

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