भोपाल

Indore: फाइनेंस कंपनी की डायरेक्टर को फोन पर घंटे भर तक रखा 'अरेस्ट', क्राइम ब्रांच ने छुड़ाई जान

इंदौर में साइबर ठगों ने फाइनेंस कंपनी की डायरेक्टर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर डराने की कोशिश की। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगों ने एक घंटे तक महिला को फोन पर रोके रखा। पति की सूचना पर क्राइम ब्रांच ने पहुंचकर बचाया।

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पति ने की क्राइम ब्रांच में शिकायत (सांकेतिक तस्वीर)

Indore News: डिजिटल अरेस्ट यानी साइबर अपराधियों का आपके दिमाग को किसी डर में उलझा कर आपको मोबाइल स्क्रीन पर ही कैमरा ऑन करके टिकाए रहना और छोड़ने के नाम पर पैसे ऐंठना। एक ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने फाइनेंस कंपनी की डायरेक्टर को टारगेट किया। ठगों ने कंपनी की डायरेक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' करने की कोशिश की थी। हालांकि, समय पर मध्य प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच ने महिला को बचाया है।

क्या है मामला

कंपनी की डायरेक्टर मोनिका सूद को एक अज्ञात कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा थाने का पुलिस अधिकारी बताया। कॉलर ने महिला को धमकाते हुए कहा कि उनकी मोबाइल सिम का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। उसने डराने की कोशिश करते हुए कहा कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करती हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कॉलर ने मोनिका सूद को निर्देश दिया कि वे फोन पर ही बनी रहें और उसके बताए निर्देशों का पालन करें।

क्राइम ब्रांच ने बचाया

घटना के समय मोनिका सूद के पति सुदीप सूद घर पर मौजूद थे। जब उन्हें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ, तो उन्होंने तत्काल पुलिस को जानकारी दी। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची और मोनिका सूद को साइबर ठगों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला।

एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने मौके पर पहुंचकर दंपति से मुलाकात की और उन्हें इस तरह की साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यह साइबर अपराधियों का नया तरीका है, जिसमें वे खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

घंटे भर रखा था 'अरेस्ट'

इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि साइबर अपराधियों ने महिला को तकरीबन एक घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' करके रखा था। ठगों ने महिला को तीन अलग-अलग नंबर से कॉल किए थे और अपनी पहचान शीर्ष पुलिस अधिकारियों के रूप में बताई थी। एडिशनल डीसीपी के मुताबिक, ठगों ने महिला को किसी होटल में ठहरने संबंधी जानकारी भी बताई थी, जो सही थी। उसी आधार पर ठगों ने अलग-अलग अधिकारी बनकर महिला से बात की।

(इनपुट-आईएएनएस)

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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