Bhiwandi-Nizampur Municipal Corporation Elections: भिवंडी-निजामपुर नगर निकाय में महापौर चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उस समय झटका लगा जब उसके 22 पार्षदों में से नौ ने एक अलग समूह बना लिया और कांग्रेस नीत गठबंधन को अपना समर्थन दिया। इससे कांग्रेस के लिए अपना महापौर चुनने का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस और शरद पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) गठबंधन ने भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से 90 सदस्यीय निकाय में 46 के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। भारतीय जनता पार्टी अलग हुए पार्षदों के खिलाफ एक्शन ले सकती है। उधर, कांग्रेस का महापौर बनने से पार्टी को नई दिशा मिलेगी।
समाजवादी पार्टी ने शिवसेना को दिया था समर्थन दिया
भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) भाजपा से अलग हुए पार्षदों द्वारा गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि नौ पार्षदों ने हमें समर्थन देने का फैसला किया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए थे। समाजवादी पार्टी ने शिवसेना को समर्थन दिया था, जिससे गठबंधन को मामूली बढ़त मिली।
दरअसल, महाराष्ट्र में महानगरपालिका के 15 जनवरी को चुनाव हुए और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए गए, जिससे भिवंडी निजामपुर नगर निगम से किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में मौको को भुनाने में कामयाब रही और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी।
भिवंडी-निजामपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली थी बढ़त
पिछले महीने हुए भिवंडी-निजामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी कांग्रेस अब अपना महापौर और उप-महापौर बनाने के लिए तैयार दिख रही है। इस चुनाव में कांग्रेस को सर्वाधिक 30 सीटें मिली। उसके बाद भाजपा (22), शिवसेना (12), राकांपा-एसपी (12), समाजवादी पार्टी (6), कोणार्क विकास अघाड़ी (4) और भिवंडी विकास अघाड़ी (3) का स्थान रहा। एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी।
