एसीबी को दी गई शिकायत में परिवादी राजेश ने बताया कि सिद्धी विनायक हॉस्पिटल, भीलवाड़ा द्वारा आयुष्मान योजना के तहत उपचार के बाद जो बिल पोर्टल पर अपलोड किए गए थे, उनके भुगतान को लेकर डॉ. पंकज छीपा ने फोन कर दबाव बनाया।
परिवादी से मुलाकात के दौरान आरोपी डॉक्टर ने खुद को रसूखदार बताते हुए कहा कि जयपुर में बैठे अपने सीनियर डॉ. कुलदीप के साथ मिलकर पूरा मामला निपटा देगा। इसके एवज में पहले 14 लाख रुपये की मांग की गई, जो बाद में 11 लाख रुपये पर तय हुई।
शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया। 15 दिसंबर 2025 को परिवादी को रिश्वत की रकम लेकर आरोपी के पास भेजा गया। आरोपी ने मौके पर 9.50 लाख रुपये डॉ. कुलदीप के लिए और 1.50 लाख रुपये अपने लिए मांगे। जैसे ही आरोपी ने 2 लाख रुपये असली नोट और 9 लाख रुपये डमी नोट स्वीकार किए, एसीबी टीम ने दबिश देकर उसे धर दबोचा।
एसीबी महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता ने बताया कि यह कार्रवाई एसीबी अजमेर रेंज के पुलिस अधीक्षक श्री महावीर सिंह राणावत के सुपरवीजन में की गई। पुलिस निरीक्षक श्री नरपत सिंह चारण के नेतृत्व में टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
यह मामला न केवल आयुष्मान योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह गरीबों के इलाज से जुड़ी योजनाओं को कुछ लोग कमाई का जरिया बना रहे हैं। एसीबी की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य तंत्र में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।