Bharat Tiwari: बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत के पांच दिन बाद उसके परिजनों की शिकायत पर शाहपुर थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया है। दर्ज एफआईआर में जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा एनकाउंटर के दौरान मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी मामले में शामिल किया गया है। भरत तिवारी की मौत को लेकर शुरू से ही परिजन, स्थानीय लोग और विभिन्न राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। मामले को लेकर लगातार बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार ने भी संज्ञान लिया है। बढ़ते सियासी विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में भरत तिवारी उर्फ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सोमवार को एक नया मुकदमा दर्ज किया गया। यह एफआईआर भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि 17 जून की सुबह डीएसपी और थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत को अपने साथ लेकर जवइनिया बाढ़ विस्थापितों के लिए आवंटित भूमि वाले इलाके में गई। बताया गया है कि भरत इस क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं को फेसबुक लाइव के माध्यम से लगातार उठाता रहा था। मां आशा देवी के अनुसार, घटनास्थल पर पहुंचने के बाद भरत ने अपना हथियार पुलिस के सामने डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर एक गड्ढे में गिरा दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर मौजूद डीएसपी के निर्देश पर पुलिस ने उस पर फायरिंग की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसे वाहन में बैठाकर ले जाया गया और शाम को पुलिस की ओर से उसके निधन की सूचना दी गई।
पिता को दो दिनों तक थाने में हिरासत में रखा
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि भरत के पिता काशीनाथ तिवारी को शाहपुर पुलिस ने दो दिनों तक थाने में हिरासत में रखा था। शिकायत के आधार पर शाहपुर थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) तथा आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों पर हत्या का आरोप लगाया गया है। मामले की जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है। भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद 17 जून की रात को शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। इस संबंध में भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने बताया था कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भरत तिवारी पुलिसकर्मियों की ओर पिस्टल ताने दिखाई दे रहा था, लेकिन उस दौरान संबंधित अधिकारियों ने समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि हालात को संभालने में लापरवाही बरती गई, जिसके चलते विभागीय कार्रवाई की गई।
पुलिस ने भरत के घर के आसपास घेराबंदी की
पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी काफी समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा था। बताया गया कि 16 जून को शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष अपनी टीम के साथ बिलौटी गांव स्थित उसके आवास पर पहुंचे थे, जहां भरत ने कथित तौर पर पुलिस दल की ओर पिस्टल तान दी थी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद 17 जून की सुबह पुलिस ने उसके घर के आसपास घेराबंदी की। इसी दौरान पुलिस और भरत तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।
मुठभेड़ के दौरान फेसबुक लाइव वीडियो
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया, जब मुठभेड़ के दौरान उसका फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया। उसके आखिरी लाइव में वह पुलिस के सामने पिस्टल फेंककर आत्मसमर्पण करता दिखाई दे रहा था। हालांकि, पुलिस का दावा है कि यह केवल सरेंडर का दिखावा था। पुलिस के अनुसार, हथियार फेंकने के बाद भरत दोबारा उसे उठाने की कोशिश कर रहा था और उसने पुलिस टीम पर गोली भी चलाई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
कई नेताओं ने की मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
वहीं, मृतक के परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी को एक नहीं बल्कि पांच गोलियां मारी गई थीं। दूसरी ओर, तत्कालीन थानाध्यक्ष द्वारा दर्ज कराई गई एनकाउंटर एफआईआर में दावा किया गया था कि भरत को केवल एक गोली लगी थी और वह भी उसके पैर में। भरत तिवारी की मौत के बाद बिहार की राजनीति में भी इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, कृषि मंत्री विजय सिन्हा, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा समेत कई नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बढ़ते राजनीतिक दबाव और जनचर्चा के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे प्रकरण की जांच हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, भरत तिवारी के परिजन अब भी संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि उन्हें न्यायिक जांच प्रक्रिया पर भी पूरा भरोसा नहीं है।
