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भारत में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है? CEC के चयन में कौन-कौन शामिल, 2023 Act से क्या बदला?

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन 2023 के कानून के बाद चयन समिति की संरचना बदल गई। जानिए पहले क्या व्यवस्था थी और अब CEC-EC का चयन कैसे होता है।

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Photo : PTI
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
Authored by: दिगपाल सिंह
Updated Sep 24, 2026, 19:08 IST
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज देश की चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तो आरोपों की झड़ी लगाई ही, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कई अन्य पर भी वोट चोरी, चुनाव चोरी के गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी इस दौरान विशेषतौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर काफी हमलावर रहे। चलिए जानते हैं, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का चयन कैसे होता है? उनकी चुनाव प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल होता है और 2023 Act के बाद क्या बदल गया?

बता दें कि भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। राष्ट्रपति के सामने नाम रखने और सिफारिश करने की प्रक्रिया कानून के तहत तय है। Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 के लागू होने के बाद CEC और EC की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई गई है।

CEC के चयन में कौन-कौन शामिल?

2023 Act की धारा 7 के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन समिति में तीन सदस्य होते हैं। इस समिति के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं।

  • प्रधानमंत्री – समिति के अध्यक्ष
  • लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष – सदस्य
  • प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री – सदस्य

अगर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को मान्यता प्राप्त न हो, तो लोकसभा में सरकार के विरोध में सबसे बड़े दल के नेता को इस भूमिका के लिए मान्यता दी जाती है। इसके बाद चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते हैं।

सर्च कमेटी की भी अहम भूमिका

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कानून में एक सर्च कमिटी का भी प्रावधान है। यह समिति पांच नामों का पैनल तैयार करती है, जिसे चयन समिति के सामने रखा जाता है। मौजूदा कानून के अनुसार सर्च कमेटी की अध्यक्षता कानून एवं न्याय मंत्री करते हैं और इसमें सचिव स्तर के दो अन्य अधिकारी भी शामिल होते हैं। हालांकि, चयन समिति सर्च कमेटी के पैनल से बाहर के नाम पर भी विचार कर सकती है।

CEC ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति कैसे हुई

भारत के मौजूदा CEC ज्ञानेश कुमार की CEC के तौर पर नियुक्ति 17 फरवरी 2025 को हुई थी। 19 फरवरी 2025 को उन्होंने भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला। बता दें कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति 2023 के नए कानून Act, 2023 के तहत हुई थी। यह इस नए कानून के तहत CEC की पहली नियुक्ति थी। बता दें कि ज्ञानेश कुमार पहले से ही चुनाव आयुक्त थे। उन्हें 15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था और लगभग 11 महीने बाद उन्हें CEC बनाया गया।

CEC ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति में कौन-कौन शामिल रहा

जैसा कि हमने ऊपर बात की, सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय सिलेक्शन कमिटी बनाई जाती है। CEC ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के लिए बनाई गई कमेटी में चयन समिति के अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री द्वारा नॉमिनेटेड कैबिनेट मंत्री के तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल थे।

राहुल गांधी की असहमति

जैसा कि आज की प्रेस कॉनफ्रेंस में राहुल गांधी ने बताया भी कि 17 फरवरी 2025 की बैठक में उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया पर dissent note दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 2023 Act को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होने तक नियुक्ति टालने की मांग की थी। समिति ने उनकी आपत्ति के बावजूद नियुक्ति की सिफारिश कर दी।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गंभीर आरोप

2023 से पहले क्या व्यवस्था थी?

संविधान के अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग और उसके सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। लेकिन लंबे समय तक संसद ने चुनाव आयोग की नियुक्ति की विस्तृत प्रक्रिया के लिए अलग से कानून नहीं बनाया था। मार्च 2023 में अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था देते हुए कहा था कि संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और CJI की समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति करें।

इसके बाद संसद ने साल 2023 का कानून बनाया। इसमें देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नॉमिनेटेड केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को इस चयन समिति में शामिल कर लिया गया। यानी मौजूदा तीन सदस्यीय पैनल में प्रधानमंत्री और उनके द्वारा नॉमिनेटेड मंत्री सरकार की तरफ से होते हैं, जबकि तीसरा सदस्य लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होता है।

Act 2023 चर्चा में क्यों है?

Act 2023 अभी चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कल यानी बुधवार 23 सितंबर को दो सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने मामले को आगे उचित पीठ के सामने रखने का निर्देश दिया। दोनों न्यायाधीश इस सवाल पर अलग-अलग राय पर पहुंचे कि मामले को बड़ी संविधान पीठ के पास भेजना चाहिए या नहीं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार,जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि पहली नजर में 2023 का कानून इस मामले में कार्यपालिका को वीटो का अधिकार देता है, क्योंकि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और नेता प्रतिपक्ष वाली समिति द्वारा की जाने वाली नियुक्ति ‘धारणा के स्तर पर भरोसे’ की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। यही नहीं जस्टिस दत्ता ने कहा कि चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे स्वतंत्र दिखना भी चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री द्वारा नॉमिनेटेड सदस्य से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीएम के फैसले का विरोध करे।

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