शहर

अटारी बॉर्डर से 584 KG हेरोइन तस्करी मामला, ED ने 18 आरोपियों के खिलाफ PMLA कोर्ट में चार्जशीट की दाखिल

ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ड्रग्स की खेप को वैध व्यापार दिखाने के लिए तस्कर हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा भारत भेजते थे। भारत में मौजूद उनका सहयोगी यह पैसा स्थानीय हवाला ऑपरेटर से लेकर अपने बैंक खातों में जमा करता था।

Image

(फोटो-ट्विटर)

पंजाब के अटारी चेक पोस्ट पर पकड़ी गई भारी मात्रा में हेरोइन तस्करी के मामले में EDने बड़ी कार्रवाई की है। ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने इस मामले में 23 मार्च 2026 को मोहाली की विशेष PMLA अदालत में प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की है। इस मामले में 18 लोगों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है, जिनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिक भी शामिल हैं। ED की जांच के मुताबिक, यह मामला 584 किलो हेरोइन और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ा है, जिसे अटारी लैंड कस्टम स्टेशन, अमृतसर पर पकड़ा गया था।

पाकिस्तान से गुलाबी सेंधा नमक की बोरियों में छिपाकर भेजी गई थी ड्रग्स

जांच में सामने आया है कि करीब 890 किलो हेरोइन और 52 किलो अन्य नशीले पदार्थ पाकिस्तान से भारत भेजे गए थे। तस्करों ने इन ड्रग्स को हल्के गुलाबी रंग के सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) की बोरियों में छिपाकर भारत भेजा था, ताकि शक न हो। ED के अनुसार इस पूरे नेटवर्क को पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे तस्कर साहिल, शोएब नूर और आमिर नूर संचालित कर रहे थे। उन्होंने जिन बोरियों में ड्रग्स छिपाई थी, उन पर क्रॉस का निशान या खास नंबर लगाए गए थे, ताकि भारत पहुंचने पर उन्हें आसानी से पहचाना जा सके।

हवाला के जरिए भारत भेजा जाता था पैसा

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ड्रग्स की खेप को वैध व्यापार दिखाने के लिए तस्कर हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा भारत भेजते थे। भारत में मौजूद उनका सहयोगी यह पैसा स्थानीय हवाला ऑपरेटर से लेकर अपने बैंक खातों में जमा करता था। इसके बाद यही पैसा भारतीय कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे कस्टम ड्यूटी और पोर्ट चार्ज का भुगतान किया जाता था। इससे यह पूरा कारोबार कानूनी आयात-निर्यात जैसा दिखाया जाता था।

गोदामों में रखकर आगे सप्लाई की जाती थी ड्रग्स

भारत पहुंचने के बाद इन कंटेनरों को पहले अस्थायी गोदामों में रखा जाता था, फिर उन्हें अंतिम गोदाम तक भेजा जाता था। यहां से नशे के कारोबारी रंजीत सिंह उर्फ राणा और इकबाल सिंह ड्रग्स को लेते थे और आगे बाजार में सप्लाई करते थे। ED की जांच में यह भी सामने आया कि पकड़ी गई खेप पाकिस्तानी तस्करों द्वारा भेजी गई छठी खेप थी। इससे पहले पांच और खेप भारत पहुंच चुकी थीं, जिनमें कुल करीब 358 किलो ड्रग्स लाई गई थी और उसे बाजार में बेच दिया गया था।

इन पांच खेपों की बिक्री से आरोपियों ने करीब 8.60 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की थी, जिसका एक हिस्सा हवाला के जरिए दुबई भी भेजा गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, रंजीत सिंह और इकबाल सिंह ने ड्रग्स की कमाई को छिपाने के लिए जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदीं। रंजीत सिंह उर्फ राणा ने अपने भाई सरवन सिंह के साथ मिलकर बड़ी मात्रा में नकद पैसा बैंक खातों में जमा कराया और फिर कई खातों के जरिए चेक ट्रांसफर करके पैसे को घुमाया, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके। बाद में इस पैसे से कई संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें से कई संपत्तियां मां, भाई और अन्य बेनामी लोगों के नाम पर खरीदी गई थीं, ताकि असली मालिक का पता न चल सके।

दुबई भेजे गए करोड़ों रुपये

जांच में यह भी सामने आया कि इकबाल सिंह ने हवाला के जरिए अप्रैल 2019 में 4.20 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम दुबई भेजी थी। इसके अलावा उसने ड्रग्स की कमाई से अपने नाम पर कृषि भूमि भी खरीदी।

  • अब तक 3.61 करोड़ की संपत्ति अटैच
  • इस मामले में ED पहले भी कार्रवाई कर चुकी है।
  • 11 अक्टूबर 2024 को करीब 1.93 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
  • इसके बाद 21 मार्च 2026 को और 1.68 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं।
  • इस तरह अब तक इस मामले में कुल 3.61 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं।
  • फिलहाल यह मामला मोहाली की विशेष PMLA अदालत में चल रहा है और ED की जांच अभी भी जारी है।
Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

और पढ़ें
End of Article