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Nalanda News: दिनदहाड़े एयरफोर्स जवान का रेता गला, हत्या से मचा तहलका

बिहार के नालंदा में दिनदहाड़े बदमाशों ने धारदार हथियार से गला रेतकर एक एयर फोर्स के जवान की हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद गांव से बदमाश फरार हो गए।

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फाइल फोटो

Photo : BCCL

नालंदा: बिहार क्राइम का गढ़ बनता जा रहा है। आए दिन हत्याओं से सरकार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। रहुई थाना इलाके के इमामगंज गांव में मंगलवार 21 नवंबर को दिनदहाड़े बदमाशों ने धारदार हथियार से गला रेतकर एक एयर फोर्स के जवान की हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद गांव से बदमाश फरार हो गए। परिजन आनन-फानन में जवान को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

रंजिश में हत्या की आशंका

घटना के संबंध में बताया जाता है कि मृतक जवान रंजीत कुमार छठ पूजा पर छुट्टी लेकर गांव आया था। तीन साल पहले शादी हुई थी। इस घटना का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। परिजनों में चर्चा है कि पूर्व के विवाद को लेकर घटना को अंजाम दिया गया है। मृतक रंजीत कुमार दिल्ली में एयरफोर्स के टेक्नीशियन के पद पर काम करता था। उधर, सबसे बड़ी बात यह है कि घंटों बीत जाने के बाद भी पुलिस सदर अस्पताल नहीं पहुंच सकी थी।

दिनदहाड़े रेता गला

मृतक के बड़े भाई धर्मवीर ने बताया कि गांव में किसी से पूर्व में विवाद हुआ था। उस मामले को गांव के स्तर पर सुलझा लिया गया था। हो सकता है कि उसी मामले को लेकर रंजीत की हत्या की गई हो। धर्मवीर ने बताया कि गांव की गली से रंजीत गुजर रहा था। इसी दौरान बदमाशों ने धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी।

मामूली विवाद में हत्या

रहुई थाना प्रभारी नंदन कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस सदर अस्पताल पहुंची थी, लेकिन परिजन शव लेकर कहीं दूसरे जगह चले गए थे। पुलिस गांव भी गई थी। पता चला है कि मामूली विवाद को लेकर गला रेतकर हत्या की गई है। मामला जो भी हो जांच की जा रही है।
Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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