गुजरात सरकार अपने शहरों को स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से आधुनिक टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इस दिशा में अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) ने आवारा गायों से जुड़ी समस्या को सुलझाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गांधीनगर में स्थापित AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक एजेंसी को AI मॉडल विकसित करने का काम सौंपा है। इस मॉडल की मदद से सीसीटीवी कैमरों द्वारा ली गई तस्वीरों के माध्यम से गाय और उसके मालिक की पहचान वास्तविक समय (Real-Time) में की जाएगी।
कैसे काम करेगा AI मॉडल?
AI मॉडल में गाय की पहचान मुख्य रूप से उसकी नाक के आकार के आधार पर होगी। जैसे प्रत्येक इंसान की फिंगरप्रिंट अलग होती है, वैसे ही हर गाय की नाक की डिजाइन भी अलग-अलग होती है। इसके साथ ही, आंखों और चेहरे पर मौजूद किसी भी दाग-धब्बे को भी स्कैन किया जाएगा। इसके आधार पर मॉडल गाय को डेटाबेस से मैच कर उसके मालिक की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में आएगी कमी
अहमदाबाद मनपा के अनुसार शहर में लगभग 1 लाख 10 हजार गायों में माइक्रोचिप और RFID टैग लगे हुए हैं। शहर के 130 प्रमुख जंक्शनों पर कैमरे द्वारा आवारा गायों की तस्वीरें ली जाती हैं। AI आधारित इस समाधान से न केवल सड़क पर आवारा गायों के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और डेटा आधारित निरीक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट से शहर में आवारा गायों से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान में मदद मिलेगी और इसे भविष्य में पूरे शहर में विस्तारित करने की योजना है।
