आगरा

ताजनगरी में खत्म होगा जाम का झाम! रेलवे यहां बना रहा है अनूठा फ्लाईओवर; जानें क्या है खासियत?

भारतीय रेलवे आगरा में समपार फाटक संख्या 77 पर 116.57 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कर रहा है। इस परियोजना के जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे यातायात की सुगमता और सुरक्षा में सुधार होगा।

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(सांकेतिक फोटो)

आगरा : ताजनगरी को जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए समपार फाटक संख्या 77 पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो शहर के रेल और सड़क यातायात को बेहतर और सुरक्षित बनाएगा। फाटक संख्या 75, 77 और 496 पर आरओबी के निर्माण से स्थानीय निवासियों और यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। फिलहाल, फाटक 77 पर आरओबी के पिलर और फाउंडेशन का कार्य चल रहा है, जिसकी कुल लागत 116.57 करोड़ रुपये है और इसे जून 2026 तक पूरा करने की योजना है। रेलवे की योजना है कि आगरा के सभी रेल फाटकों को समाप्त कर आरओबी का निर्माण किया जाए, जिससे फाटक बंद होने के कारण होने वाली देरी और जाम की समस्या समाप्त हो सके।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

रुई की मंडी क्षेत्र में फाटक के कारण प्रतिदिन जाम की समस्या बनती है और स्थानीय लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। स्थानीय जनता कई वर्षों से आरओबी की मांग कर रही थी। इस आरओबी के निर्माण से रुई की मंडी से शाहगंज जाने वाले ट्रैफिक में आधे से अधिक कमी आएगी, जिससे केवल बोदला और जयपुर की ओर जाने वाले वाहन ही शाहगंज बाजार से गुजरेंगे। इससे स्थानीय खरीदारी करने वालों को जाम से राहत मिलेगी और दुकानदारों का व्यवसाय भी बढ़ेगा।

विशेष रूप से, रेलवे पहली बार तीन दिशाओं में उतरने वाला फ्लाईओवर बना रहा है, जो यातायात को और सुगम बनाएगा। इस आरओबी के निर्माण से तीन रेलवे क्रॉसिंग समाप्त हो जाएंगी, जिससे लोगों का सफर आसान और तेज होगा। यह प्रोजेक्ट आगरा के निवासियों के लिए समय, सुविधा और सुरक्षा के मामले में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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