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ISL टूर्नामेंट का रुकना खिलाड़ियों-फैंस के सपनों का ठहरना, फुटबॉल प्लेयर्स के समर्थन में उतरे केजरीवाल; क्या बोले

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भारतीय फुटबॉलरों के साथ आज देश की जनता की सहानुभूति है। खिलाड़ी कोई मांग नहीं कर रहे, वे सिर्फ़ खेलने का हक़ और सम्मान चाहते हैं। भारत और उसके जुनूनी फुटबॉल प्रेमी इससे बेहतर के हक़दार हैं।

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फुटबॉल खिलाड़ियों के समर्थन में उतरे अरविंद केजरीवाल (फोटो-@ArvindKejriwal)

दिल्ली : भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। जनवरी 2026 आ चुका है, लेकिन 2025–26 इंडियन सुपर लीग (ISL) सीजन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। जुलाई 2025 से यह लीग अनिश्चितकाल के लिए स्थगित पड़ी है। यह सिर्फ एक टूर्नामेंट के रुकने की बात नहीं है, बल्कि हजारों खिलाड़ियों, कोचों, सपोर्ट स्टाफ और करोड़ों फैंस के सपनों के ठहर जाने की कहानी है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े नाम राष्ट्रीय टीम के कप्तान सुनील छेत्री, दिग्गज गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू, सीनियर डिफेंडर संदेश झिंगन और कुछ विदेशी आईसीएल खिलाड़ी जैसे ह्यूगो बुमूस- 2 जनवरी 2026 को एक संयुक्त वीडियो जारी कर सीधे फीफा से हस्तक्षेप की अपील करने को मजबूर हुए।

खिलाड़ियों का इस तरह अंतरराष्ट्रीय संस्था से गुहार लगाना, भारतीय फुटबॉल प्रशासन की गहरी नाकामी और वर्षों की अव्यवस्था को उजागर करता है। आज हालात यह हैं कि खिलाड़ियों के करियर ठहर गए हैं। युवा प्रतिभाओं को मौके नहीं मिल रहे। कई क्लब वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। विदेशी खिलाड़ी भारत छोड़कर दूसरी लीगों का रुख कर रहे हैं, जबकि भारतीय खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ बिना मैच, बिना आय और बिना भविष्य की स्पष्टता के फंसे हुए हैं। आईसीएल के साथ-साथ I-League और निचली डिवीजन की प्रतियोगिताएं भी इस संकट की चपेट में हैं।

खिलाड़ियों के सम्मान की ज़रूरत-केजरीवाल

इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारतीय फुटबॉल आज ऐसे नाज़ुक मोड़ पर खड़ा है, जहां अगर अब भी सही और ईमानदार फैसले नहीं लिए गए, तो आने वाले सालों में यह खेल पूरी तरह बर्बादी की ओर चला जाएगा। और जब खिलाड़ियों को खेल बचाने के लिए फीफा और सरकार से अपील करनी पड़े, तो यह सालों की बदइंतज़ामी और उपेक्षा का नतीजा है। उन्होंने साफ कहा कि खेल को राजनीति और पावर स्ट्रगल नहीं, बल्कि पारदर्शी गवर्नेंस, जवाबदेही और खिलाड़ियों के सम्मान की ज़रूरत है।

अरविंद केजरीवाल का यह स्टैंड उन लाखों फैंस की भावना को आवाज़ देता है जो आज निराश और आहत हैं। स्टेडियम खाली हैं, युवा खिलाड़ी हताश हैं और देश का एक लोकप्रिय खेल प्रशासनिक राजनीति की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सवाल यह है कि केंद्र की बीजेपी सरकार कब तक आंखें मूंदे रहेगी? क्या खिलाड़ियों का भविष्य और देश का खेल सिर्फ़ पावर गेम का शिकार बना रहेगा?

भारतीय फुटबॉलरों के साथ आज देश की जनता की सहानुभूति है। खिलाड़ी कोई मांग नहीं कर रहे, वे सिर्फ़ खेलने का हक़ और सम्मान चाहते हैं। भारत और उसके जुनूनी फुटबॉल प्रेमी इससे बेहतर के हक़दार हैं। अब भी वक्त है कि सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर खेल और खिलाड़ियों को बचाया जाए, वरना यह संकट आने वाली पीढ़ियों के सपनों को भी तोड़ देगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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