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IRCTC Tatkal Booking Mystery: 11 बजे खुलती है बुकिंग और 11.02 पर सब गायब! आखिर कुछ ही सेकंड में कहां उड़ जाती हैं तत्काल की सारी सीटें?

आईआरसीटीसी पर तत्काल बुकिंग शुरू होते ही महज दो मिनट में सारी सीटें गायब होने के पीछे कई कारण हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण डिमांड जायद और सीट कम है।

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Indian Railway Waiting Ticket

भारतीय रेलवे में यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए 'तत्काल टिकट' (Tatkal Ticket) बुक करना किसी लॉटरी से कम नहीं है। रोजाना सुबह जैसे ही घड़ी में 10 (एसी क्लास) और 11 (नॉन-एसी क्लास) बजते हैं, देश भर के लाखों लोग अपने मोबाइल और लैपटॉप पर आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या ऐप खोलकर बैठ जाते हैं। लेकिन जैसे ही बुकिंग विंडो खुलती है, पलक झपकते ही यानी मात्र दो मिनट के भीतर सारी सीटें 'नो एवेलेबिलिटी' (No Availability) या लंबी वेटिंग लिस्ट में बदल जाती हैं। आम यात्री अक्सर हैरान रह जाते हैं कि आखिर कुछ ही सेकंड के भीतर कंप्यूटर की स्क्रीन लोड होने से पहले सारी सीटें कहां उड़ जाती हैं?

ऑनलाइन बुकिंग के इस क्रैश के बीच रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर (Ticket Counter) से टिकट बुक होने की रफ्तार बहुत तेज होती है। आइए बेहद जानते हैं कि मोबाइल या लैपटॉप के मुकाबले काउंटर से तत्काल टिकट जल्दी क्यों बुक हो जाता है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

कैसे तुरंत बुक हो जाती हैं सारी सीट?

इस रहस्य के पीछे का सबसे बड़ा तकनीकी कारण है 'नेटवर्क रूटिंग और डायरेक्ट सर्वर कनेक्टिविटी'। जब आप अपने घर पर मोबाइल, लैपटॉप या वाई-फाई के जरिए आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर लॉग-इन करते हैं, तो आपकी रिक्वेस्ट इंटरनेट के एक बहुत लंबे रास्ते (पब्लिक नेटवर्क) से होते हुए रेलवे के मुख्य सर्वर (CRIS) तक पहुंचती है। इस दौरान लाखों लोग एक साथ सर्वर पर हिट कर रहे होते हैं, जिससे पब्लिक गेटवे पूरी तरह जाम हो जाता है और आपको 'बफरिंग' या 'एरर' जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दूसरी तरफ, रेलवे स्टेशनों पर बने टिकट काउंटर्स का कंप्यूटर सिस्टम इंटरनेट के सामान्य नेटवर्क पर काम नहीं करता। वे रेलवे के अपने खुद के पर्सनल और सुपरफास्ट 'इंट्रानेट' से सीधे जुड़े होते हैं। इस वजह से काउंटर के सिस्टम में बफरिंग या नेटवर्क स्लो होने की गुंजाइश न के बराबर होती है और उनकी कमांड सीधे मुख्य सर्वर पर बिना किसी रुकावट के प्रोसेस हो जाती है। इसके अलावा कई ट्रेनों में डिमांड ज्यादा रहती है और तत्काल सीट कम तो ऐसे भी जल्दी सारे टिकट बुक हो जाते हैं.

इस वजह से भी नहीं मिलती है टिकट

दूसरा महत्वपूर्ण कारण 'फॉर्म सबमिशन और पेमेंट गेटवे' (No Payment Gateways) का समय बचना है। जब आप ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं, तो आपको यात्रियों के नाम, उम्र भरने के बाद कैप्चा (Captcha) कोड डालना पड़ता है। इसके बाद सबसे ज्यादा समय पेमेंट करने में जाता है, जहां यूपीआई, नेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड का पेज लोड होने और ओटीपी (OTP) आने में कीमती सेकंड बर्बाद हो जाते हैं। तत्काल बुकिंग में एक-एक सेकंड का महत्व होता है। इसके विपरीत, रेलवे काउंटर पर बैठे क्लर्क के पास आपका भरा हुआ फिजिकल फॉर्म पहले से होता है। वे बुकिंग शुरू होने से पहले ही आपकी डिटेल्स (जैसे नाम, ट्रेन नंबर) को अपने स्पेशल सॉफ्टवेयर सिस्टम में 'प्री-की' (पहले से टाइप) करके रखते हैं। जैसे ही ठीक 11 बजते हैं, वे सिर्फ एक सिंगल 'एंटर' (Enter) दबाते हैं। चूंकि काउंटर पर न तो कोई कैप्चा कोड डालना होता है और न ही किसी ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और ओटीपी का इंतजार करना होता है (वहां कैश या पीओएस मशीन से सीधे भुगतान होता है), इसलिए काउंटर से टिकट महज 10 से 15 सेकंड के भीतर प्रिंट होकर बाहर आ जाता है।

कैसे मिलेगी कंफर्म टिकट?

इसके अलावा, गैर-कानूनी सॉफ्टवेयर और अवैध एजेंट्स (Illegal Software & Agents) का खेल भी ऑनलाइन टिकट गायब होने की एक बड़ी वजह है। हालांकि रेलवे प्रशासन लगातार इन पर सख्त कार्रवाई कर रहा है और हाल ही में काउंटर बुकिंग पर भी मोबाइल ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन कुछ शातिर दलाल अभी भी प्रतिबंधित हाई-स्पीड बुकिंग स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करते हैं। ये अवैध सॉफ्टवेयर आम इंसान की तुलना में सौ गुना तेजी से पैसेंजर डिटेल्स ऑटो-फिल कर देते हैं और बैंक के सुरक्षा चक्र को बाईपास करके पल भर में सीटें ब्लॉक कर लेते हैं। जब तक एक आम नागरिक अपने फोन पर ओटीपी दर्ज करता है, तब तक ये दलाल और बॉट्स सिस्टम से सारी सीटें उड़ा चुके होते हैं।

यदि आप भी अगली बार तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं और ऑनलाइन ही कन्फर्म टिकट पाने के चांस बढ़ाना चाहते हैं, तो काउंटर जैसी रफ्तार पाने के लिए कुछ ट्रिक्स अपना सकते हैं। सबसे पहले, आईआरसीटीसी ऐप में जाकर 'मास्टर लिस्ट' (Master List) फीचर के जरिए यात्रियों के नाम और उम्र की डिटेल पहले से सेव कर लें, ताकि बुकिंग के समय टाइपिंग का समय बचे। दूसरा, पेमेंट के लिए 'आईआरसीटीसी वॉलेट' (IRCTC Wallet) में पैसे पहले से लोड करके रखें या भीम यूपीआई (BHIM UPI) का इस्तेमाल करें, क्योंकि इसमें बैंक का रीडायरेक्शन पेज बहुत फास्ट काम करता है और ओटीपी का झंझट कम होता है। इन तरीकों को अपनाकर आप घर बैठे भी एजेंटों और काउंटर की स्पीड को मात दे सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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