सरकारी महारत्न कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के शेयर में बुधवार को करीब 6 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई। जबकि कंपनी ने दिसंबर तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा दिखाया है। मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद स्टॉक पर दबाव सरकार के हिस्सेदारी बेचने के फैसले की वजह से देखने को मिला।
दिसंबर तिमाही में 206% उछला मुनाफा
दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही यानी Q3 FY26 में BHEL का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 206.5 फीसदी बढ़कर 382.49 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 124.77 करोड़ रुपये था। कंपनी की ऑपरेशंस से आय भी मजबूत रही और 16.4 फीसदी बढ़कर 8,473.10 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले यह 7,277.09 करोड़ रुपये थी। टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) भी 203 फीसदी बढ़कर 511.92 करोड़ रुपये रहा। वहीं, प्रति शेयर कमाई (EPS) 0.36 रुपये से बढ़कर 1.10 रुपये पर पहुंच गई। पावर सेगमेंट से 6,322 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया और 497 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज हुआ, जबकि इंडस्ट्री सेगमेंट ने 2,150 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 424 करोड़ रुपये का लाभ दिया।
फिर भी शेयर क्यों टूटा?
शेयर में गिरावट की असली वजह सरकार द्वारा BHEL में हिस्सेदारी बिक्री का ऐलान है। सरकार OFS (Offer For Sale) के जरिए कंपनी में 3 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है, जिसे ग्रीनशू ऑप्शन के जरिए 5 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है। इस OFS के लिए फ्लोर प्राइस 254 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो बाजार भाव से डिस्काउंट पर है। ऐसे में निवेशक सस्ते स्तर पर शेयर मिलने की उम्मीद में सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली करते हैं, जिससे शेयर कीमत पर दबाव बनता है। OFS दो कारोबारी दिनों यानी 11 और 12 फरवरी को खुलेगा।
ओएफएस में क्या हो रहा?
सरकार BHEL में अपनी 3 फीसदी हिस्सेदारी OFS (ऑफर फॉर सेल) के जरिए बेच रही है, जिसमें करीब 10.44 करोड़ शेयर बाजार में उतारे जा रहे हैं और ग्रीनशू ऑप्शन के जरिए यह हिस्सेदारी 5 फीसदी तक बढ़ सकती है। इस बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस 254 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो बाजार भाव से कम है। OFS 11 और 12 फरवरी को खुला है, ऐसे में निवेशक सस्ते स्तर पर शेयर मिलने की उम्मीद में बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जिससे शेयर पर दबाव दिख रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी के ऑर्डर बुक, पावर सेक्टर की मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में बढ़ोतरी से लंबी अवधि का आउटलुक मजबूत बना हुआ है। हालांकि, अल्पकाल में OFS के चलते शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब OFS की मांग और इसके बाद स्टॉक में स्थिरता लौटने पर रहेगी।
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