कमजोर तिमाही नतीजों के बाद Reliance Industries के शेयरों को लेकर निवेशकों में असमंजस है। मुनाफे में गिरावट और मार्जिन दबाव ने चिंता बढ़ाई है, लेकिन ब्रोकरेज हाउस अब भी लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा जता रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि अब रणनीति क्या होनी चाहिए?
Reliance इस समय एक ट्रांजिशन फेज में है, जहां पारंपरिक बिजनेस दबाव में हैं, लेकिन नए बिजनेस भविष्य की ग्रोथ का आधार तैयार कर रहे हैं। इसलिए यह स्टॉक कमजोर नतीजों के बावजूद पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है, बल्कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बना हुआ है।
ब्रोकरेज का रुख, सावधानी के साथ भरोसा
नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज हाउस ने टारगेट प्राइस में कटौती की है, लेकिन ज्यादातर ने ‘Buy’ या ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखी है। उनका मानना है कि O2C साइक्लिकल है और आने वाले समय में सुधार संभव है। साथ ही Jio लिस्टिंग, Retail स्केल-अप और New Energy जैसे बड़े ट्रिगर्स भविष्य में वैल्यू अनलॉक कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति
मौजूदा हालात में घबराकर बिकवाली करना समझदारी नहीं होगी। शॉर्ट टर्म में दबाव जरूर बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। ऐसे में जिन निवेशकों के पास शेयर हैं, वे टिके रह सकते हैं, जबकि नई एंट्री करने वाले निवेशक गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।

ब्रोकरेज अब भी बाय साइड में खड़े
O2C बिजनेस ने बिगाड़ी कमाई की तस्वीर
चौथी तिमाही में Reliance का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 13% घटकर ₹16,971 करोड़ रहा, जो साफ तौर पर ऑपरेशनल दबाव को दिखाता है। मार्जिन में भी गिरावट आई और यह 15% पर आ गया। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण O2C सेगमेंट रहा, जहां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वेस्ट एशिया तनाव और सरकारी नीतिगत दबाव ने कमाई पर असर डाला। यही वजह रही कि कुल प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर दिखा।
रेवेन्यू मजबूत, लेकिन मार्जिन चिंता का कारण
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी की टॉपलाइन मजबूत बनी रही और रेवेन्यू 13% बढ़कर ₹2.94 लाख करोड़ पहुंच गया। इसका मतलब है कि बिजनेस ग्रोथ जारी है, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना हुआ है। बढ़ते खर्च और सीमित प्राइस पास-थ्रू की वजह से मार्जिन पर असर साफ नजर आया।
Jio और Retail ने संभाला मोर्चा
ऊर्जा कारोबार की कमजोरी के बीच कंपनी के कंज्यूमर बिजनेस ने राहत दी। Jio में सब्सक्राइबर ग्रोथ और ARPU में सुधार जारी रहा, जिससे कमाई को सपोर्ट मिला। वहीं Retail सेगमेंट में क्विक कॉमर्स और FMCG विस्तार ने ग्रोथ को गति दी, हालांकि निवेश बढ़ने से मार्जिन पर हल्का दबाव भी बना रहा।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
