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क्या आप जानते हैं? 'Term Life Insurance' लेते समय लोग क्या बड़ी गलती करते हैं और यह सामान्य बीमा से क्यों अलग है?

टर्म लाइफ इंश्योरेंस एक 'प्योर प्रोटेक्शन प्लान' है, जो कम प्रीमियम में बड़ा लाइफ कवर देता है, जबकि सामान्य बीमा में निवेश और रिटर्न भी शामिल होता है। इसे लेते समय बीमारी छुपाना और कम समय के लिए पॉलिसी चुनना सबसे बड़ी गलतियां हैं।

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Term Insurance

आज के दौर में अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करना हर समझदार इंसान की सबसे पहली प्राथमिकता होती है। जब भी वित्तीय सुरक्षा की बात आती है, तो 'टर्म लाइफ इंश्योरेंस' (Term Life Insurance) को सबसे बेहतरीन और जरूरी निवेश माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद, बहुत से लोग टर्म प्लान खरीदते समय कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी भारी कीमत बाद में उनके परिवार को चुकानी पड़ती है। अक्सर लोग टर्म इंश्योरेंस को पारंपरिक या सामान्य जीवन बीमा (जैसे एंडोमेंट या मनी-बैक प्लान) समझने की भूल कर देते हैं। टर्म प्लान की सही समझ न होने और खरीदते समय लापरवाही बरतने से भविष्य में क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं टर्म लाइफ इंश्योरेंस क्या है, यह सामान्य बीमा से क्यों अलग है और इसे लेते समय आपको किन बड़ी गलतियों से बचना चाहिए।

टर्म लाइफ इंश्योरेंस सामान्य बीमा से अलग कैसे है?

टर्म इंश्योरेंस एक 'प्योर प्रोटेक्शन प्लान' (Pure Protection Plan) होता है। इसमें आप बीमा कंपनी को एक निश्चित समय (जैसे 25 या 30 साल) के लिए बहुत कम प्रीमियम चुकाते हैं। यदि इस अवधि के दौरान पॉलिसीधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो उसके परिवार (नॉमिनी) को एक बड़ी एकमुश्त राशि (Sum Assured) मिलती है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित रहता है। लेकिन, अगर पॉलिसीधारक सुरक्षित रहता है और मैच्योरिटी की अवधि पूरी हो जाती है, तो इसमें कोई रिटर्न या पैसा वापस नहीं मिलता। इसके विपरीत, सामान्य जीवन बीमा या ट्रेडिशनल प्लान में सुरक्षा के साथ-साथ निवेश (Investment) का भी तत्व होता है, जहां मैच्योरिटी पर आपको बोनस के साथ पैसा वापस मिलता है। चूंकि सामान्य बीमा में कंपनी को पैसा लौटाना होता है, इसलिए उसका प्रीमियम बहुत महंगा होता है और उसमें मिलने वाला लाइफ कवर (सुरक्षा चक्र) बहुत छोटा होता है। वहीं, टर्म इंश्योरेंस में बहुत कम प्रीमियम में करोड़ों रुपये का बड़ा कवर मिल जाता है।

कौन सी गलतियां कर देते हैं लोग?

1. मेडिकल इतिहास और बीमारियों को छुपाना: यह सबसे आम और खतरनाक गलती है। कई लोग प्रीमियम की रकम को थोड़ा कम रखने के चक्कर में या इस डर से कि पॉलिसी रिजेक्ट न हो जाए, अपनी मौजूदा बीमारियों (जैसे डायबिटीज, हाई बीपी) या धूम्रपान (Smoking/Drinking) जैसी आदतों को फॉर्म में छुपा लेते हैं। याद रखिए, बीमा कंपनियां क्लेम देने से पहले गहन जांच करती हैं। यदि मौत के बाद कंपनी को पता चला कि पॉलिसीधारक ने कोई जानकारी छुपाई थी, तो वे क्लेम खारिज (Reject) कर सकती हैं, जिससे आपके परिवार को एक रुपया भी नहीं मिलेगा।

2. बहुत छोटा लाइफ कवर (Sum Assured) चुनना: लोग अक्सर सोचते हैं कि 10 या 20 लाख रुपये का बीमा उनके परिवार के लिए बहुत है, लेकिन वे भविष्य की महंगाई और जिम्मेदारियों का अंदाजा नहीं लगा पाते। विशेषज्ञ मानते हैं कि आपका टर्म कवर आपकी सालाना आमदनी का कम से कम 10 से 15 गुना होना चाहिए। यदि आपकी सालाना आय ₹5 लाख है, तो आपका टर्म प्लान कम से कम 50 से 75 लाख रुपये का होना चाहिए, ताकि आपके न रहने पर परिवार अपनी जीवनशैली और बच्चों की पढ़ाई का खर्च आसानी से उठा सके।

3. कम अवधि (Policy Term) के लिए पॉलिसी लेना: कई लोग प्रीमियम बचाने के लिए सिर्फ 10 या 15 साल का टर्म प्लान ले लेते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप 30 साल की उम्र में 15 साल का प्लान लेते हैं, तो 45 की उम्र में आपकी पॉलिसी खत्म हो जाएगी। उस उम्र में जब आपको सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होगी, तब दोबारा नया टर्म प्लान लेना या तो बहुत महंगा पड़ेगा या बढ़ती उम्र और बीमारियों के कारण कंपनी पॉलिसी देने से मना कर सकती है। इसलिए पॉलिसी हमेशा अपनी रिटायरमेंट की उम्र (60 या 65 वर्ष) तक के लिए ही चुननी चाहिए।

4. पॉलिसी डॉक्यूमेंट और नियम-शर्तों को न पढ़ना: ज्यादातर लोग एजेंट के कहने पर या ऑनलाइन बस 'टिक' करके पॉलिसी खरीद लेते हैं और उसके 'नियम और शर्तें' (Terms & Conditions) नहीं पढ़ते। पॉलिसी में क्या-क्या कवर नहीं है (Exclusions), जैसे कि आत्महत्या, साहसिक खेल (Adventure Sports) या प्राकृतिक आपदाओं के मामले में नियम क्या हैं, यह जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारी) या एक्सीडेंटल डेथ जैसे जरूरी 'राइडर्स' को न जोड़ना भी एक बड़ी चूक होती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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