NSE Share Price Listing : नेशनल स्टॉक एक्स्चेंज यानी NSE के शेयरों की आज 24 सितंबर को BSE पर लिस्टिंग होने जा रही है। करीब ₹22,569 करोड़ का यह IPO निवेशकों की मजबूत मांग के बीच 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अब लिस्टिंग से ठीक पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयर करीब ₹43-45.5 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। इसके हिसाब से ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड (Upper Price Band) के मुकाबले करीब 2.4-2.6% के संभावित प्रीमियम की उम्मीद की जा रही है। हालांकि GMP, कोई आधिकारिक इंडिकेटर नहीं है, जिससे लिस्टिंग के भाव का पता चले।
कैसी लिस्टिंग की उम्मीद कर रहे?
ज्यादातर एनालिस्ट NSE Shares को लॉन्गटर्म के लिए होल्ड करने की राय रखते हैं। इसके अलावा ज्यादातर ब्रोकरेज ने भी IPO Note में इस इश्यू को लॉन्गटर्म के लिए सब्सक्राइब करने की राय रखी है। इस तरह NSE को सिर्फ लिस्टिंग गेन का सौदा मानने की जगह निवेशकों को लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन के नजरिये से देखना चाहिए।
ज्यादा लिस्टिंग गेन की उम्मीद क्यों नहीं?
एनालिस्ट मानते हैं कि NSE से ज्यादा लिस्टिंग गेन की उम्मीद नहीं की जा सकती है, क्योंकि 1,785 के IPO प्राइस पर FY26 के डायलुटेड EPS पर NSE का वैल्यूएशन करीब 40.9-42.9 गुना है। यह BSE के करंट वैल्यूएशन से कम है, जिससे वैल्युएशन सपोर्ट मिलता है। लेकिन, NSE का करीब 79% रेवेन्यू ट्रेडिंग एक्टिविटी से आता है, जिसे लेकर लगातार रेगुलेटरी जोखिम बढ़ रहा है।
NSE की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
NSE की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम है। कंपनी का कारोबार ट्रेडिंग के साथ क्लियरिंग, इंडेक्स लिस्टिंग और मार्केट डाटा सर्विसेज तक फैला है। NSE का डायवर्सिफाइड इकोसिस्टम उसे कई रेवेन्यू स्ट्रीम देता है।
IPO को मिली मजबूत डिमांड
NSE के IPO को अंतिम दिन तक करीब 50.58 करोड़ शेयर के लिए बिड मिले, जबकि 8.86 करोड़ शेयर ऑफर किए गए थे। इससे कुल सब्सक्रिप्शन 5.71 गुना रहा। QIB ने इश्यू 12.68 गुना और NII ने करीब 6.55 गुना सब्सक्राइब किया। रिटेल में यह 1.39 गुना भरा। IPO से करीब ₹90,300 करोड़ की डिमांड पैदा हुई। यह IPO करीब ₹22,569 करोड़ का था और भारत के सबसे बड़े इश्यूज में शामिल है। यह 2024 के ₹27,870 करोड़ के Hyundai Motor India IPO के बाद दूसरा सबसे बड़ा IPO है।
नए निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि लिस्टिंग के तुरंत बाद प्राइस डिस्कवरी का दौर अहम रहेगा। एनालिस्ट इसे लॉन्ग टर्म का स्टॉक मान रहे हैं, ऐसे में कमजोर या सपाट लिस्टिंग पर वे निवेशक भी इसमें लॉन्ग टर्म के लिए एंट्री ले सकते हैं, जिन्हें IPO में शेयर अलॉट नहीं हुए हैं।
