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क्या है TVS परिवार का विवाद, क्यों चल रही बाप-बेटा Vs मां-बेटी की भिडंत ?

देश के सबसे पुराने और बड़े कारोबारी घरानों में शामिल TVS ग्रुप में जबरदस्त खींचतान चल रही है। दिलचस्प बात यह है कि दूसरे बिजनेस घरानों की तरह यहां लड़ाई भाइयों में नही, बल्कि बाप-बेटा बनाम मां-बेटी के बीच है।

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टीवीएस परिवार का विवाद अदालत तक पहुंचा

TVS Family Dispute Explained: देश के पुराने कारोबारी घरानों में शामिल TVS Group के भीतर उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे का विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस जंग में एक तरफ TVS Motor Company के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan) और उनके बेटे सुदर्शन वेणु (Sudarshan Venu) हैं, जबकि दूसरी तरफ उनकी पत्नी मल्लिका श्रीनिवासन (Mallika Srinivasan) और बेटी लक्ष्मी वेणु (Lakshmi Venu) है।

12 और 13 अक्टूबर 2026 को चेन्नई की सिविल और कमर्शियल अदालतों में परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे के खिलाफ 8 कैविएट दाखिल किए। 28 अक्टूबर तक उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद का अंतिम समाधान नहीं हुआ है। हालांकि, मल्लिका और लक्ष्मी ने बातचीत के जरिये सौहार्दपूर्ण समझौते की इच्छा जताई है।

एक ही परिवार के भीतर पति-पत्नी और भाई-बहन के बीच लड़ाई के इस मामले के पीछे TVS Holdings से जुड़े कारोबार, संपत्तियां और अधिकार हैं। एक तरफ जहां पिता चाहते हैं कि पूरा कारोबार बेटा सुदर्शन संभालें। वहीं, मां और बेटी की इच्छा है कि कारोबार के साथ ही संपत्तियों और संसाधनों में उनको भी बराबर हक मिले।

8 कैविएट दाखिल होने का क्या मतलब है?

कैविएट अदालत में दाखिल की जाने वाली एक एहतियाती कानूनी अर्जी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई दूसरा पक्ष किसी मामले में राहत या अंतरिम आदेश मांगता है, तो कैविएट दाखिल करने वाले व्यक्ति को सुने बिना उसके खिलाफ एकतरफा आदेश न दिया जाए।

चेन्नई की सिटी सिविल कोर्ट और कमर्शियल कोर्ट में 12 और 13 अक्टूबर को कुल 8 कैविएट दाखिल किए गए। चार सिविल कोर्ट में और चार कमर्शियल कोर्ट में दाखिल हुए। इन अर्जियों में परिवार के दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को नामित किया।

क्या है मौजूदा स्थिति?

सुदर्शन TVS Motor Company के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वह TVS Holdings से जुड़े कारोबार की भी अगुवाई करते हैं। वहीं, लक्ष्मी Sundaram-Clayton की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और मार्च 2025 से Tractors and Farm Equipment Limited (TAFE) की वाइस चेयरपर्सन भी हैं। जबकि, Mallika TAFE की चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

MoU विवाद क्या है?

फिलहाल, विवाद की जड़ 20 मार्च, 2024 को तैयार और 21 मार्च, 2024 को परफॉर्म किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) पर है। इस MoU पर वेणु, मल्लिका, सुदर्शन और लक्ष्मी ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में TVS ब्रांड के इस्तेमाल, ट्रेडमार्क और कुछ कारोबारी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा नहीं करने से जुड़े प्रावधान शामिल थे।

TVS Holdings की शेयर बाजार को दी गई सूचना में भी इस MoU का उल्लेख किया गया था। कंपनी ने स्पष्ट किया था कि वह खुद इस समझौते की पक्षकार नहीं है। दाखिल सूचना में MoU को 10 दिसंबर, 2020 के व्यापक पारिवारिक समझौते के अतिरिक्त हुई समझ के रूप में बताया गया।

क्या है वेणु और सुदर्शन का पक्ष?

बाप-बेटे इस लड़ाई में एक खेमे में हैं और मानते हैं कि 2020 से शुरू हुई प्रक्रिया और 2024 के MoU को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि कारोबारी जिम्मेदारियों, संपत्तियों और भविष्य के उत्तराधिकार की व्यवस्था पहले से तय थी। इस नजरिए में सुदर्शन के पास TVS Motor और उससे जुड़े कारोबार हैं, जबकि Lakshmi के लिए Sundaram-Clayton और अन्य संपत्तियां हैं। इस पक्ष का यह भी कहना है कि पहले के मूल्यांकन और संबंधित देनदारियों को नजरअंदाज करके आज के बाजार भाव के आधार पर बंटवारे को दोबारा नहीं परखा जाना चाहिए।

क्यों नाराज हैं मां-बेटी?

मां-बेटी का कहना है कि ब्रांड के इस्तेमाल और नॉन-कंपीट यानी प्रतिस्पर्धा से जुड़े समझौते को संपत्ति के अंतिम आर्थिक बंटवारे का समझौता नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, कारोबारी जिम्मेदारी मिलना और उस कारोबार में आर्थिक मालिकाना हक मिलना अलग-अलग बातें हैं। उनका कहना है कि संपत्तियों का पारदर्शी मूल्यांकन, आपसी बातचीत और सहमति से आर्थिक समझौता अभी पूरा नहीं हुआ है।

वैल्युएशन से मचा है बवाल

इस विवाद की गहराई में बाप-बेटे और मां-बेटी के पास मौजूद कंपनियों के बाजार मूल्य में अंतर है। अक्टूबर 2026 की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, TVS Motor Company का मार्केट कैप लगभग ₹1.83 लाख करोड़ था, जबकि डाइकास्टिंग कारोबार वाली Sundaram-Clayton का बाजार मूल्य करीब ₹24,000 करोड़ बताया गया।

TVS Holdings इस मामले में अहम है, क्योंकि उसके पास TVS Motor Company की लगभग 50.26% हिस्सेदारी है। इसलिए TVS Holdings में मालिकाना हक और नियंत्रण का सवाल परिवार के उत्तराधिकार के लिए विशेष महत्व रखता है।

इसके अलावा TVS Emerald और TVS Credit जैसे कारोबारों का मूल्यांकन, संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े संभावित टैक्स और TVS Motor में बहुमत हिस्सेदारी बनाए रखने का सवाल भी चर्चा में है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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