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पर्सनल लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी? आधा इंडिया रहता है इस बात से कन्फ्यूज

अगर आप भी किसी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए पर्सनल लोन लेने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है. पर्सनल लोन लेने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए या क्या हर किसी को आसानी से पर्सनल लोन मिल जाता है, ये कुछ ऐसे सवाल है जो आमतौर पर हर किसी के मन में आते हैं, तो आइए आपको बताते हैं आखिर पर्सनल लोन लेने के लिए आपकी कितनी सैलरी होनी चाहिए?

Personal Loan

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैसों की जरूरत कब पड़ जाए, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है। कभी घर की मरम्मत, कभी बच्चों की पढ़ाई, तो कभी अचानक मेडिकल खर्च ऐसे मौकों पर पर्सनल लोन लोगों के लिए सबसे आसान विकल्प बन जाता है। लेकिन जैसे ही आप बैंक या लोन ऐप पर आवेदन करते हैं, सबसे पहला सवाल यही पूछा जाता है कि आपकी मंथली सैलरी कितनी है। दरअसल, पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के मिलता है, इसलिए बैंक आपकी कमाई और भुगतान करने की क्षमता को बहुत गंभीरता से देखते हैं।

क्या है पर्सनल लोन?

पर्सनल लोन को अनसिक्योर्ड लोन कहा जाता है, यानी इसमें आपको कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी होती। इसी वजह से बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आपकी सैलरी इतनी हो कि आप हर महीने ईएमआई समय पर चुका सकें। साल 2025 में बढ़ती महंगाई और खर्चों को देखते हुए कई बैंकों ने अपनी पात्रता शर्तों में हल्के बदलाव किए हैं।

पर्सनल लोन के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी?

अगर भारत के बड़े बैंकों की बात करें, तो न्यूनतम सैलरी की सीमा अलग-अलग है। HDFC बैंक में पर्सनल लोन के लिए आमतौर पर कम से कम 25,000 रुपये नेट मंथली इनकम जरूरी मानी जाती है। वहीं SBI में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा लगभग 20,000 रुपये और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए 25,000 रुपये के आसपास रखी जाती है। यानी सैलरी जितनी ज्यादा होगी, लोन मिलने की संभावना उतनी बेहतर मानी जाती है।

हालांकि, सिर्फ सैलरी होना ही काफी नहीं है। बैंक आपकी रीपेमेंट कैपेसिटी भी जांचते हैं। इसके लिए वे FOIR यानी Fixed Obligation to Income Ratio देखते हैं। आसान भाषा में कहें तो आपकी कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के 40% से 50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर आप पहले से होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड की भारी ईएमआई चुका रहे हैं, तो नया पर्सनल लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।

ये चीज रखती है मायने

इसके अलावा, क्रेडिट स्कोर सबसे अहम फैक्टर माना जाता है। अगर आपका CIBIL स्कोर 750 या उससे ऊपर है, तो बैंक कम सैलरी पर भी आप पर भरोसा कर सकते हैं। लेकिन अगर स्कोर 650 से नीचे है, तो 40-50 हजार रुपये की सैलरी होने के बावजूद बैंक लोन देने से हिचक सकते हैं। साथ ही, आपकी नौकरी की स्थिरता भी मायने रखती है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि आप कम से कम 1 से 2 साल से नौकरी में हों।

कम है सैलरी तो कैसे मिलेगा लोन?

अब सवाल आता है कि कम सैलरी वालों के लिए क्या विकल्प हैं? अगर आपकी सैलरी 15,000 रुपये से कम है, तो बड़े बैंक शायद लोन न दें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास कोई रास्ता नहीं है। आजकल कई NBFCs और फिनटेक कंपनियां हैं, जो 12,000 से 15,000 रुपये की सैलरी पर भी छोटे पर्सनल लोन दे देती हैं। हालांकि, इनमें ब्याज दरें थोड़ी ज्यादा हो सकती हैं।

एक और समझदारी भरा तरीका है को-एप्लीकेंट जोड़ना। अगर आपकी सैलरी कम है, तो आप अपने जीवनसाथी या माता-पिता को लोन में शामिल कर सकते हैं, जिनकी अपनी आय हो। इससे बैंक की नजर में आपकी कुल आय बढ़ जाती है और न सिर्फ लोन मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि ज्यादा रकम भी मिल सकती है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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