कोरोना काल के बाद 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) का चलन पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ा है। भारत में भी आईटी (IT) और कई अन्य सेक्टर की कंपनियों ने इसे स्थाई रूप से अपना लिया है। इसी बदलाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने नए लेबर कोड (New Labour Code) या नए वेज कोड में वर्क फ्रॉम होम को लेकर विशेष प्रावधान किए हैं। अब तक घर से काम करना केवल कंपनी और कर्मचारी के बीच का आपसी समझौता होता था, लेकिन अब सरकार इसे कानूनी ढांचे के भीतर लाने की तैयारी कर रही है। इससे उन करोड़ों कर्मचारियों पर सीधा असर पड़ेगा जो ऑफिस जाने के बजाय घर से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
नए लेबर कोड में क्या है खास?
नए लेबर कोड के तहत 'वर्क फ्रॉम होम' को पहली बार औपचारिक मान्यता दी जा रही है। सरकार ने 'मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर्स' में इसके लिए अलग से प्रावधान किए हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक स्पष्ट पॉलिसी बनानी होगी। नए नियमों के अनुसार, कंपनी और कर्मचारी आपसी सहमति से घर से काम करने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके लिए बकायदा सर्विस कंडीशन (Service Conditions) तय की जाएंगी, जिससे भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में कर्मचारी के पास कानूनी सुरक्षा होगी।
सैलरी और भत्तों (Allowances) पर क्या होगा असर?
वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल सैलरी को लेकर होता है। नए वेज कोड में इस बात पर चर्चा की गई है कि घर से काम करने के दौरान होने वाले खर्चों का भुगतान कौन करेगा। ऑफिस में बिजली, इंटरनेट और फर्नीचर का खर्च कंपनी उठाती है, लेकिन घर पर यह बोझ कर्मचारी पर आता है। नए नियमों के संकेत मिलते हैं कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को इंटरनेट खर्च, बिजली बिल और घर पर छोटा ऑफिस सेटअप करने के लिए 'रिएम्बर्समेंट' या विशेष भत्ता दे सकती हैं। हालांकि, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव होने के कारण इन हैंड सैलरी पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि नए कोड में बेसिक सैलरी का हिस्सा कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है।
काम के घंटे और ओवरटाइम के नियम
वर्क फ्रॉम होम की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि इसमें काम के घंटे तय नहीं होते। नए वेज कोड में काम के घंटों (Working Hours) को लेकर भी स्पष्टता लाने की कोशिश की गई है। सरकार का प्रस्ताव है कि घर से काम करने के दौरान भी शिफ्ट का समय तय होना चाहिए। यदि कोई कर्मचारी तय घंटों से ज्यादा काम करता है, तो वह ओवरटाइम का हकदार हो सकता है। इससे कर्मचारियों के निजी जीवन और पेशेवर जीवन (Work-Life Balance) के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि घर से काम करने वाले कर्मचारियों को भी ऑफिस आने वाले कर्मचारियों के समान ही छुट्टियां और अन्य सुविधाएं मिलें।
मौज है या मुश्किल?
कर्मचारियों के नजरिए से देखें तो यह एक बड़ा फायदा है क्योंकि उन्हें कानूनी मान्यता और भत्ते मिलने की उम्मीद है। वहीं, कंपनियों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि उन्हें अब घर से काम करने वालों के लिए भी कड़े नियमों का पालन करना होगा। नए लेबर कोड में कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा (Social Security) जैसे ईपीएफ (EPF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) के नियमों को भी मजबूत किया गया है, जिसका लाभ वर्क फ्रॉम होम करने वालों को भी बराबर मिलेगा।
वर्क फ्रॉम होम को लेकर कुछ सवाल जवाब FAQ
- क्या है
वर्क फ्रॉम होम (WFH) का मतलब है ऑफिस जाने के बजाय अपने घर से ही आधिकारिक कार्य करना। इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल) के माध्यम से कर्मचारी कंपनी के कार्यों को पूरा करते हैं और अपनी टीम से जुड़ते हैं। यह मॉडल समय की बचत, लचीलेपन और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की सुविधा देता है, जो आजकल काफी लोकप्रिय है।
नए वेज कोड के नियमों के अनुसार, काम के घंटों को लेकर स्पष्टता रखी गई है। यदि कोई कर्मचारी निर्धारित वर्किंग ऑवर्स (जैसे 8 या 9 घंटे) से अधिक काम करता है, तो वह ओवरटाइम का हकदार हो सकता है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि घर से काम करने का मतलब 'अनलिमिटेड वर्किंग ऑवर्स' नहीं है।
नए वेज कोड में 'बेसिक सैलरी' को कुल CTC का कम से कम 50% रखने का नियम है। इससे आपके पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, जिससे आपकी रिटायरमेंट सेविंग तो बढ़ेगी लेकिन हाथ में आने वाली (In-hand) सैलरी में थोड़ा बदलाव हो सकता है। यह नियम ऑफिस और घर दोनों जगह से काम करने वालों पर समान रूप से लागू होगा।
नए नियमों में इस बात का प्रावधान है कि कंपनियां घर से काम करने के लिए जरूरी संसाधनों (जैसे इंटरनेट, बिजली, स्टेशनरी) के लिए विशेष भत्ते (Allowances) दे सकती हैं। कई कंपनियां पहले से ही 'WFH Allowance' दे रही हैं, और नए कोड के बाद इसे लेकर अधिक स्पष्ट पॉलिसी बनने की उम्मीद है।
बिल्कुल। नया वेज कोड भेदभाव को समाप्त करता है। जो कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं, वे भी उसी सोशल सिक्योरिटी (EPF, ESIC, ग्रेच्युटी) और सालाना छुट्टियों के हकदार होंगे, जो ऑफिस जाकर काम करने वाले कर्मचारियों को मिलती हैं।
FAQs
क्या है Work From Home?
वर्क फ्रॉम होम (WFH) का मतलब है ऑफिस जाने के बजाय अपने घर से ही आधिकारिक कार्य करना। इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल) के माध्यम से कर्मचारी कंपनी के कार्यों को पूरा करते हैं और अपनी टीम से जुड़ते हैं। यह मॉडल समय की बचत, लचीलेपन और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की सुविधा देता है, जो आजकल काफी लोकप्रिय है।
