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क्या होगा दुनिया पर असर
जानकारों का मानना है कि ये टैरिफ उत्पादन लागत बढ़ाएंगे, ट्रेड रूट्स को प्रभावित करेंगे और कंपनियों को मजबूर करेंगे कि वे अपने सप्लाई नेटवर्क को फिर से डिजाइन करें। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि अगर टैरिफ युद्ध बढ़ा, तो वैश्विक जीडीपी में 0.5% की कमी आ सकती है, जिसका असर नौकरियों और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ेगा।
कौन से सेक्टर ज्यादा हो सकते हैं प्रभावित
टैरिफ से सप्लाई चेन में भारी दिक्कतें आएंगी। वे कंपनियां जो चीन पर निर्भर रही हैं, अब वियतनाम, भारत, और मेक्सिको जैसे देशों की ओर रुख कर सकती हैं, लेकिन उनके लिए यह बदलाव तुरंत संभव नहीं होगा। टैरिफ वॉर के बीच कंपनियां उत्पादन में डायवर्सिफिकेशन बढ़ा रही हैं।
इससे माल ढुलाई लागत बढ़ेगी, और उपभोक्ताओं को उच्च कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव सप्लाई चेन को कमजोर कर सकते हैं, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव क्षेत्रों में।
भारत को फायदा
भारत के लिए यह स्थिति अवसर और चुनौती दोनों लाई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, चीनी और बांग्लादेशी निर्यात पर उच्च टैरिफ से भारत को कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी में अमेरिकी बाजार में जगह बनाने का मौका मिल सकता है।
भारत की दवा कंपनियां, जो अमेरिका को सस्ती जेनेरिक दवाएं सप्लाई करती हैं, टैरिफ से बची रहेंगी, क्योंकि फार्मास्यूटिकल्स को छूट दी गई है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ रक्षा और ऊर्जा सौदों से भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है, जिससे निवेश आकर्षित होगा।
भारत के लिए चुनौतियां
भारत को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जानकारों के अनुसार 26% टैरिफ भारत की आर्थिक वृद्धि को 0.5% तक कम कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात पर असर पड़ेगा, खासकर जब भारत ने उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना में भारी निवेश किया है।
चीन से 70% सक्रिय फार्मा सामग्री (API) आयात पर निर्भरता भी उत्पादन लागत बढ़ा सकती है। छोटे निर्यातकों के लिए उच्च लॉजिस्टिक लागत और प्रतिस्पर्धा में कमी एक बड़ी बाधा होगी।
क्या निकल सकता है नतीजे
जानकार मानते हैं कि भारत को इस संकट में फायदा उठाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और नीति स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। GTRI का मानना है कि आसान कारोबार और निवेश आकर्षित करने से भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। लेकिन अगर चीन अपने माल को भारत में डंप करता है, तो स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में तेजी लानी चाहिए और सप्लाई डायवर्सिफिकेशन बढ़ानी चाहिए। यह टैरिफ युद्ध भारत के लिए एक कसौटी होगी, जिसका नतीजा इसकी तैयारी पर निर्भर करेगा।
