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US-China Tariffs War: US-चीन टैरिफ वॉर से सप्लाई चेन पर पड़ेगा असर, महंगाई समेत सामने आएंगे कई खराब नतीजे, जानें भारत का क्या होगा

US-China Tariffs War Impact: अमेरिका ने चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी है। जहां एक और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बाकी देशों को मोहलत दी है, तो वहीं चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125 फीसदी कर दिया। इसके जवाब में चीन ने अमेरिका के खिलाफ और तगड़ी जवाबी कार्रवाई की घोषणा करते हुए अमेरिकी आयात पर 125 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

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यूएस-चीन टैरिफ वॉर गहराया

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • यूएस-चीन टैरिफ वॉर गहराया
  • सप्लाई चेन पर पड़ेगा असर
  • भारत के सामने भी चुनौतियां

US-China Tariffs War Impact: अमेरिका ने चीन को छोड़कर बाकी देशों के लिए टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी है। जहां एक और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बाकी देशों को मोहलत दी है, तो वहीं चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125 फीसदी कर दिया। इसके जवाब में चीन ने अमेरिका के खिलाफ और तगड़ी जवाबी कार्रवाई की घोषणा करते हुए अमेरिकी आयात पर 125 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। अब इसके बाद भी व्हाइट हाउस शांत नहीं हुआ, बल्कि अमेरिका ने चाइनीज इम्पोर्ट पर 145% की दर से टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। चीन और अमेरिका बुरी तरह टैरिफ वॉर में उलझ गए हैं। संभावना है कि चीन फिर से अमेरिका पर पलटवार करे। मगर यह टकराव ग्लोबल सप्लाई चेन को हिला रहा है, जो दशकों से लागत और एफिशिएंसी पर आधारित रही है।

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क्या होगा दुनिया पर असर

जानकारों का मानना है कि ये टैरिफ उत्पादन लागत बढ़ाएंगे, ट्रेड रूट्स को प्रभावित करेंगे और कंपनियों को मजबूर करेंगे कि वे अपने सप्लाई नेटवर्क को फिर से डिजाइन करें। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि अगर टैरिफ युद्ध बढ़ा, तो वैश्विक जीडीपी में 0.5% की कमी आ सकती है, जिसका असर नौकरियों और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ेगा।

कौन से सेक्टर ज्यादा हो सकते हैं प्रभावित

टैरिफ से सप्लाई चेन में भारी दिक्कतें आएंगी। वे कंपनियां जो चीन पर निर्भर रही हैं, अब वियतनाम, भारत, और मेक्सिको जैसे देशों की ओर रुख कर सकती हैं, लेकिन उनके लिए यह बदलाव तुरंत संभव नहीं होगा। टैरिफ वॉर के बीच कंपनियां उत्पादन में डायवर्सिफिकेशन बढ़ा रही हैं।

इससे माल ढुलाई लागत बढ़ेगी, और उपभोक्ताओं को उच्च कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव सप्लाई चेन को कमजोर कर सकते हैं, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव क्षेत्रों में।

भारत को फायदा

भारत के लिए यह स्थिति अवसर और चुनौती दोनों लाई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, चीनी और बांग्लादेशी निर्यात पर उच्च टैरिफ से भारत को कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी में अमेरिकी बाजार में जगह बनाने का मौका मिल सकता है।

भारत की दवा कंपनियां, जो अमेरिका को सस्ती जेनेरिक दवाएं सप्लाई करती हैं, टैरिफ से बची रहेंगी, क्योंकि फार्मास्यूटिकल्स को छूट दी गई है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ रक्षा और ऊर्जा सौदों से भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है, जिससे निवेश आकर्षित होगा।

भारत के लिए चुनौतियां

भारत को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जानकारों के अनुसार 26% टैरिफ भारत की आर्थिक वृद्धि को 0.5% तक कम कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात पर असर पड़ेगा, खासकर जब भारत ने उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना में भारी निवेश किया है।

चीन से 70% सक्रिय फार्मा सामग्री (API) आयात पर निर्भरता भी उत्पादन लागत बढ़ा सकती है। छोटे निर्यातकों के लिए उच्च लॉजिस्टिक लागत और प्रतिस्पर्धा में कमी एक बड़ी बाधा होगी।

क्या निकल सकता है नतीजे

जानकार मानते हैं कि भारत को इस संकट में फायदा उठाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और नीति स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। GTRI का मानना है कि आसान कारोबार और निवेश आकर्षित करने से भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। लेकिन अगर चीन अपने माल को भारत में डंप करता है, तो स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में तेजी लानी चाहिए और सप्लाई डायवर्सिफिकेशन बढ़ानी चाहिए। यह टैरिफ युद्ध भारत के लिए एक कसौटी होगी, जिसका नतीजा इसकी तैयारी पर निर्भर करेगा।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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