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UPI से ₹2000 तक का ही पेमेंट फ्री, इससे ज्यादा पर कितना लगेगा चार्ज? जानें नया नियम

UPI लोगों को तत्काल भुगतान की सुविधा देता है और ग्राहकों को खरीदारी करते समय सीधे व्यापारियों को भुगतान करने की सुविधा भी देता है।

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यूपीआई से भुगतान पर जल्द लगेगा चार्ज

अगर आप PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM ऐप का इस्तेमाल UPI करने के लिए करते हैं तो यह खबर आपके लिए है। 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर जल्द ही आपको चार्ज देना होगा। बता दें कि सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में इससे अधिक के भुगतान पर आपको चार्ज देना होगा।

बता दें कि 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर कितना चार्ज लगाना है, इसका फैसला NPCI (National Payment Corporation of India) को करना है। माना जा रहा है कि यह रेट 0.3% से 0.5% तक हो सकता है। इसका मतलब हुआ कि अगर आप किसी दुकान से ₹10000 का सामान यूपीआई से पेमेंट कर खरीदते हैं तो दुकानदार को ₹30 से ₹50 चुकाना होगा। यानी सीधे तौर पर यह चार्ज खरीदार को नहीं होगा। हां, यह संभव है कि इसकी वसूली दुकानदार समान के दाम के जरिये करे। वहीं, लोग एक दूसरे से लेनदेन करेंगे तो उन्हें कोई चार्ज नहीं लगेगा चाहे अमाउंट कितना भी हो।

सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि पर यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता है।

सरकार ने अधिसूचना जारी की

सोमवार यानी 14 सितंबर की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता रुपे डेबिट कार्ड या 2,000 रुपये तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन के जरिये भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा। यह अधिसूचना भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा-10ए में संशोधन के बाद जारी की गई है। यह संशोधन यूपीआई और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के जरिये किए गए भुगतान पर व्यापारियों से व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लेने के लिए सक्षम ढांचा उपलब्ध कराता है।

संशोधन विधेयक को संसद के 13 अगस्त, 2026 को समाप्त मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था। विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अगुवाई वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति एमडीआर की दरों पर फैसला करेगी।

UPI पर चार्ज लागने की क्यों पड़ी जरूरत

सरकार ने UPI पर चार्ज लगाने के कारण बताते हुए बयान में कहा था कि लेनदेन की संख्या में तेजी से वृद्धि के साथ प्रणाली को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और बुनियादी ढांचे में लगातार बड़े निवेश एवं उन्नयन की जरूरत है। बयान में कहा गया था कि बाजार का विस्तार करने और प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुल्क जरूरी हैं। अधिक कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाना जरूरी है और इसके लिए आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल की जरूरत है।

सरकार ने कहा था कि विकास के अगले चरण के लिए केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना व्यवहार्य नहीं है। यह सुनिश्चित करने के लिए भी संतुलित ढांचे की जरूरत है कि यूपीआई मजबूत, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहे। यूपीआई का संचालन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) करता है जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ की पहल है।

भारत के साथ 11 देशों में चल रहा UPI

विदेशों में इसकी मौजूदगी की बात करें तो यूपीआई अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। हाल ही में उज्बेकिस्तान भी इस सूची में शामिल हुआ है। अन्य देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और यूनान शामिल हैं जहां यूपीआई स्वीकार किया जाता है।

2016 को शुरू हुआ था UPI

गौरतलब है कि 25 अगस्त, 2016 को शुरू किए गए यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को बदल दिया है। इसका लेनदेन मूल्य वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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