RBI KYC Framework Debit Hold : अगर आपके बैंक खाते (Bank Account) में किसी लेनदेन (Transaction) को अगर संदिग्ध (Cyber Fraud या Money Mule Activity) से जुड़ा माना गया, तो बैंक उस ट्रांजैक्शन पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकता है। RBI ने KYC फ्रेमवर्क में संशोधन का ड्राफ्ट जारी करते हुए, ऐसी स्थिति के लिए एक यूनिफॉर्म और टाइम बाउंड प्रॉसेस
प्रस्तावित किया है। इसके तहत टेंपरेरी डेबिट होल्ड सामान्य स्थिति में अधिकतम 60 दिन तक रह सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था 1 अप्रैल, 2027 से लागू हो सकती है।
क्यों नया नियम बना रहा RBI?
यह प्रस्ताव खास तौर पर उन बैंक खातों और लेनदेन से जुड़ा है, जिनका इस्तेमाल सायबर फ्रॉड से मिले पैसे के लेनदेन में किया जा सकता है। RBI का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त, 2026 के निर्देश के बाद तैयार किए जा रहे SOP से जुड़ा है।
क्या होता मनी म्यूल अकाउंट है?
मनी म्यूल अकाउंट (Money Mule Account) वह बैंक खाता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से फ्रॉड से मिले पैसे को लेने या आगे ट्रांसफर करने के लिए अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिये घुमाने के लिए किया जाता है। जरूरी नहीं कि अकाउंट होल्डर हमेशा जानबूझकर इस फ्रॉड में शामिल हो। कुछ मामलों में व्यक्ति को यह पता भी नहीं होता कि उसके अकाउंट का इस्तेमाल अवैध पैसे के लेनदेन के लिए किया जा रहा है। RBI के मौजूदा KYC फ्रेमवर्क में भी बैंक को म्यूल अकाउंट की पहचान के लिए मॉनिटरिंग और ड्यू डिलिजेंस करने और जरूरत पड़ने पर सस्पिशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट यानी STR दाखिल करने को कहा गया है।
संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर क्या होगा?
प्रस्तावित SOP के मुताबिक बैंक का ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम अगर ₹1,000 या उससे ज्यादा के किसी ट्रांजैक्शन को सस्पेक्ट मनी म्यूल ट्रांजैक्शन के रूप में फ्लैग करता है, तो बैंक टेंपरेरी डेबिट होल्ड लगा सकता है। ऐसे मॉनिटरिंग में AI और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा अगर पूरा अकाउंट सस्पेक्टेड माना जाता है, तो ट्रांजैक्शन की जगह अकाउंट को ही होल्ड पर डाला जा सकता है। हालांकि, अकाउंट को होल्ड पर डालने की कार्रवाई को RBI ने आखिरी विकल्प और अपवाद की स्थिति की कार्रवाई के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव रखा है।
ग्राहक को 20 दिन में देना होगा जवाब
डेबिड होल्ड लगाने के बाद बैंक को अकाउंट होल्डर को इसकी जानकारी देनी होगी। नोटिफिकेशन में होल्ड लगाने का कारण, उसे हटाने की प्रक्रिया और संबंधित बैंक ऑफिसर के कॉन्टैक्ट डिटेल्स देने का प्रस्ताव है। इसके बाद कस्टमर से ट्रांजैक्शन या अकाउंट को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जवाब देने के लिए 20 दिन का समय दिया जाएगा। अगर कस्टमर की सफाई से बैंक संतुष्ट हो जाता है, तो टेंपरेरी डेबिट होल्ड को तुरंत हटाना होगा और कस्टमर को इसकी जानकारी देनी होगी।
Bank को कब लेना होगा फैसला?
ग्राहक से सफाई मिलने के बाद बैंक को मामले की जांच और जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद बैंक को 10 दिन के भीतर फैसला लेना होगा। यानी प्रपोज्ड टाइमलाइन इस तरह समझी जा सकती है। सबसे पहले कोई ट्रांजैक्शन फ्लैग होगा। बैंक टेम्परेरी डेबिट होल्ड लगाएगा। ग्राहक 20 दिन में जवाब देगा। ग्राहक के जबाव के 10 दिन के भीतर बैंक को फैसला करना होगा। अगर तय समय में ग्राहक सफाई नहीं देता, तो होल्ड पर बैंक को 30 दिन के भीतर मामले पर फैसला लेना होगा।
क्या पुलिस को भेजा जा सकता है मामला?
अगर बैंक को लगे कि मामला सायबर फ्रॉड से जुड़ा हो सकता है, तो वह इसे पुलिस या सक्षम प्राधिकरण को भेजा जा सकता है। ऐसे मामले में बैंक को संबंधित प्राधिकरण के निर्देश के मुताबिक एक्शन लेना होगा। प्रस्तावित SOP में यह भी कहा गया है कि अगर प्राधिकरण से अकाउंट पर रोक लगाने जैसा निर्देश नहीं मिलता है, तो डेबिट होल्ड को 31वें दिन हटाना होगा। इसके बावजूद कुल मिलाकर किसी टेंपरेरी डेबिट होल्ड की अधिकतम अवधि सामान्य स्थिति में 60 दिन होगी से ज्यादा नहीं होगी।
60 दिन बाद क्या होगा?
सबसे अहम बात यह है कि 60 दिन को ऑटोमेटिक पर्मानेंट फ्रीज नहीं समझना चाहिए। RBI के प्रस्तावित फ्रेमवर्क में 60 दिन अधिकतम अवधि है। इस अवधि के बाद या तो बैंक होल्ड को हटा देगा, या फिर संबंधित प्राधिकरण से मिले निर्देश का पालन किया जाएगा।
किन बैंक पर लागू होगा फ्रेमवर्क?
प्रस्तावित SOP कमर्शियल बैंक, पेमेंट बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक और ग्रामीण व अरबन को-ऑपरेटिव बैंकों पर लागू होंगे। बैंकों को इसके लिए अपने इंटरनल सिस्टम और पॉलिसीज में संदिग्ध लेनदेन की पहचान, होल्ड लगाने और हटाने व ग्राहक को जानकारी देने के स्पष्ट नियम और सिस्टम बनाकर रखने होंगे।
