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Budget 2026: GST में आएंगे पेट्रोल-डीजल? पेट्रोलियम मंत्रालय ने मांगी टैक्स में राहत

Union Budget 2026-27 से पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकार के सामने एक अहम मांग रखी है, जिससे आम लोगों की जेब पर भी असर पड़ सकता है। मंत्रालय चाहता है कि तेल-गैस सेक्टर पर टैक्स दरों को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप किया जाए। ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री भी लंबे समय से मांग कर रही है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाया जाए। ऐसे में बजट 2026 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं।

Budget 2026 oil and gas

पेट्रोलियम मंत्रालय चाहता है राहत (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

Union Budget 2026-27 से पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। ET Now की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय चाहता है कि तेल-गैस सेक्टर पर टैक्स स्ट्रक्चर को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप किया जाए, ताकि 2030 तक घरेलू उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सके। इसी मांग के साथ मंत्रालय ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाने की बात भी दोहराई है। संकेत साफ हैं कि बजट 2026 में टैक्स रेट्स, रॉयल्टी और पुराने ब्लॉक्स पर लगने वाले लेवी को लेकर बड़े फैसले की उम्मीद बन रही है।

क्या है पेट्रोलियम मंत्रालय की मांग?

रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने आगामी बजट में प्रभावी टैक्स रेट को घटाकर 35%-40% के दायरे में लाने की सिफारिश की है। मंत्रालय का तर्क है कि ऊंचे टैक्स और अनिश्चित नीति के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है और प्रोडक्शन बढ़ाने की लागत भी बढ़ती है। 2030 के उत्पादन लक्ष्य को देखते हुए सरकार के लिए जरूरी है कि टैक्सेशन को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और निवेश-फ्रेंडली बनाया जाए।

पुराने ब्लॉक्स पर टैक्स में समानता की मांग

मंत्रालय ने Pre-NELP ब्लॉक्स पर टैक्स को HELP रेजीम के अनुरूप करने की मांग भी रखी है। यहां सबसे अहम बात यह है कि Pre-NELP के तहत आवंटित फील्ड्स से निकलने वाला तेल-गैस देश के घरेलू उत्पादन का करीब 90% हिस्सा बनाता है। ऐसे में मंत्रालय चाहता है कि पुराने ब्लॉक्स पर टैक्स नियमों का बोझ कम किया जाए, ताकि प्रोडक्शन और कैशफ्लो दोनों बेहतर हो सकें।

GST में पेट्रोल-डीजल?

पेट्रोलियम प्रोडक्ट GST के दायरे में लाए जाएं, इसके लिए ऑयल और गैस इंडस्ट्री के साथ ही तमाम हितधारक सरकार से मांग कर चुके हैं। चूंकि यह मामला GST से जुड़ा है, ऐसे में फैसला बजट में नहीं बल्कि, GST काउंसिल में होगा। हालांकि, फिलहाल सरकार की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है, जिससे माना जाए कि पेट्रोल-डीजल GST में आएंगे। लेकिन, अगर ऐसा होता है तो इंडस्ट्री के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट, टैक्स कैस्केडिंग और लॉजिस्टिक्स लागत जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

डीजल-पेट्रोल पर राहत मिलेगी या नहीं?

आम उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की नजर इस बात पर है कि क्या बजट 2026 में डीजल-पेट्रोल पर टैक्स कट की कोई घोषणा होती है या नहीं। क्योंकि, इंटरनेशनल मार्केट में लगातार कच्चे तेल का दाम नरम बना हुआ है।

स्थिर टैक्स नीति की मांग

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि तेल-गैस सेक्टर में ग्रोथ के लिए स्थिर टैक्सेशन पॉलिसी बेहद जरूरी है। निवेश लंबी अवधि का होता है और एक्सप्लोरेशन से लेकर कमर्शियल प्रोडक्शन तक सालों लगते हैं। ऐसे में टैक्स नियमों में बार-बार बदलाव से प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल प्लानिंग बिगड़ती है और निवेशकों की रुचि कमजोर पड़ती है।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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