बिजनेस

Crude पर 6 साल का सबसे बड़ा डिस्काउंट, फिर भी इंडियन बास्केट ब्रेंट से ऊपर! $120 औसत

सऊदी अरब ने अपने बेंचमार्क क्रूड पर 6 साल में सबसे बड़ा डिस्काउंट ऑफर किया है। यह डिस्काउंट ओमान और दुबई के बेंचमार्क की तुलना में 3 डॉलर ज्यादा है। हालांकि, इसके बाद भी ICB ब्रेंट से ऊपर है।

Image

ब्रेंट क्रूड की तुलना में भारतीय बास्केट में क्रूड महंगा क्यों

Brent Crude Oil Vs Indian Basket : क्रूड ऑयल के दाम लगातार 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के बीच है। वहीं, Brent Crude का भाव भी 105 से 110 के बीच में है। खाड़ी के तेल उत्पादकों के बीच इस समय एशियाई खरीदारों को आकर्षित करने की होड़ तेज है और इसका असर क्रूड की प्राइसिंग में दिख रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका और ईरान के युद्ध के बीच क्रूड की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद सऊदी अरब ने अपने बेंचमार्क क्रूड पर 6 साल में पहली बार 5 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट का ऐलान किया है। इसके अलावा तमाम दूसरे खाड़ी देश भी क्रूड पर डिस्काउंट दे रहे हैं।

दूसरी तरफ भारतीय बास्केट में ब्रेंट की बड़ी हिस्सेदारी रहती है। लेकिन, इसके बावजूद Indian Crude Basket यानी ICB में पिछले महीने का औसत 116 और इस महीने अब तक का औसत 120 डॉलर प्रति बैरल है। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान ICB में Brent की औसत हिस्सेदारी करीब 72.4% रही। लेकिन, इस पूरे समय में इंडियन बास्केट में क्रूड ब्रेंट से महंगा रहा है।

यह इस वजह से भी हैरान करने वाला है, क्योंकि आमतौर पर इंडियन बास्केट में क्रूड का दाम ब्रेंट से नीचे रहता है। लेकिन, पिछले कुछ समय से यह लगातार ब्रेंट से ऊपर बना हुआ है। ब्रेंड जहां 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में है। वहीं, इंडियन बास्केट का औसत 115 से 120 डॉलर प्रति बैरल बना हुआ है।

एशियाई खरीदारों को डिस्काउंट की झड़ी

खाड़ी देशों की तरफ से एशियन क्रूड सप्लाई पर बड़ा डिस्काउंट देखने को मिल रहा है। एशियाई सप्लाई के लिए सऊदी अरब ने अरब लाइट पर $5 प्रति बैरल, अरब मीडियम पर $6 और अरब हैवी को $7.35 प्रति बैरल का डिस्काउंट रखा गया है। इसके अलावा ईराक, कुवैत और दूसरे देश भी अपने क्रूड की कीमत डिस्काउंट ऑफर कर रहे हैं।

इंडियन बास्केट में क्रूड क्यों महंगा?

ICB में क्रूड महंगा होने की बड़ी वजह फिजिकल क्रूड सप्लाई और Dated Brent में कीमतों का अंतर है। पश्चिम एशिया तनाव के चलते शिपिंग काफी महंगी हो गई है। इसके अलावा फ्रेट इंश्योरेंस भी बढ़ गया है। इन वजहों से फिजिकल क्रूड पर रिस्क प्रीमियम देखने को मिल रहा है। जबकि, ब्रेंट फ्यूचर का रेट आगे की स्थिति को प्राइस इन करते हुए चलता है, जिसमें बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद होने पर उनकी कीमत फिजिकल मार्केट से नीचे रहती है। मोटे तौर पर PPCA की तरफ से जो ICB रेट दिया जाता है, वह वास्तविक रेट होता है, जिस पर खरीद हो रही है। जबकि, Brent फ्यूचर के रेट दिखा रहा होता है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article