बिजनेस

Ethanol Petrol-एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से पुराने और कई नए वाहन तकनीकी रूप से प्रभावित होने का दावा किया जा रहा, जिससे माइलेज घटने और इंजन में नुकसान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

Image

1001699756.jpg

केंद्र सरकार के 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता एडवोकेट अक्षय मल्होत्रा ने कहा है कि देशभर में केवल एथेनॉल मिक्स पेट्रोल की बिक्री करना उपभोक्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि करोड़ों वाहन अभी भी इस तरह के पेट्रोल के अनुकूल नहीं हैं।

एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को लेकर याचिका में क्या है मांग?

याचिका में कहा गया है कि एथेनॉल पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज घट रही है। इंजन और वाहन के अन्य हिस्सों में जंग लग रही है तथा मरम्मत पर खर्च भी बढ़ रहा है। याचिका में दलील दी गई है कि इस पेट्रोल के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के क्लेम को बीमा कंपनियां भी खारिज कर रही हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को पर्याप्त समय दिए बिना ही इस नीति को लागू कर दिया, जो मनमाना और गैरजरूरी है।

याचिका में ये भी तर्क दिया गया है कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में उपभोक्ताओं को पेट्रोल का विकल्प दिया जाता है। वहां ऐसी व्यवस्था है कि पेट्रोल पंप पर एथनॉल रहित पेट्रोल भी उपलब्ध होता है और पंपों पर साफ लेबल भी लगे होते हैं कि ईंधन में कितना एथनॉल मिला है। लेकिन भारत में उपभोक्ताओं को जानकारी दिए बिना केवल एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल बेचा जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह एथेनॉल मुक्त पेट्रोल की बिक्री फिर से शुरू करे। इसके अलावा प्रत्येक पेट्रोल पंप पर स्पष्ट लेबलिंग जरूरी किया जाए। सभी गाड़ियों पर एथेनॉल मिक्स पेट्रोल के लंबे समय तक इस्तेमाल से पढ़ने वाले बुरे असर का अध्ययन भी कराया जाए।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

और पढ़ें
End of Article