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Bank Employee Loan: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक कर्मचारियों को दिया झटका, बिना ब्याज या कम ब्याज दर वाले लोन पर लगेगा TAX

Supreme Court On Bank Employee Loan: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बैंकों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिया गया ब्याज-मुक्त (Interest Free) या कम ब्याज पर दिया गया लोन अनुलाभ (Fringe Benefits) या "सुविधा" (Amenities) माना जाएगा और इस तरह ये टैक्सेबल होगा।

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बैंक कर्मचारी लोन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • बैंक कर्मचारियों को SC से लगा झटका
  • कम ब्याज या ब्याज मुक्त लोन होगा टैक्सेबल
  • इस तरह के लोन को माना जाएगा बेनेफिट

Supreme Court On Bank Employee Loan: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंकों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिया गया ब्याज-मुक्त (Interest Free) या कम ब्याज पर दिया गया लोन अनुलाभ (Fringe Benefits) या "सुविधा" (Amenities) माना जाएगा और इस तरह ये टैक्सेबल होगा। इस मामले में आयकर नियम को बरकरार रखते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को मिले ऐसे लाभ उनके लिए "यूनीक" हैं और 'अनुलाभ' की कैटेगरी के हैं, इसलिए इन पर टैक्स भी लगेगा। कई बैंकों के कर्मचारी यूनियनों और ऑफिसर एसोसिएशंस ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 17(2)(viii) और आयकर नियम, 1962 के नियम 3(7)(i) की संवैधानिकता को चुनौती दी थी।

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क्या कहता है आयकर का नियम

धारा 17(2)(viii) अनुलाभों को परिभाषित करती है और इसमें "कोई अन्य अतिरिक्त लाभ या सुविधा जो निर्धारित की जा सकती है" शामिल है। बैंक यूनियनों का रुख यह था कि नियम 3(7)(i) मनमाना है और बैंक द्वारा ग्राहक से लोन पर ली जाने वाली वास्तविक ब्याज दर के बजाय एसबीआई की प्रमुख उधार दर को बेंचमार्क मानकर संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

एसबीआई की ब्याज दर को निर्धारित करना मनमाना नहीं

शीर्ष अदालत के अनुसार, बेंचमार्क के तौर पर एसबीआई की ब्याज दर को तय करना न तो मनमाना है और न ही शक्ति का असमान प्रयोग है, क्योंकि नियम बनाने वाली अथॉरिटी ने असमान के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया है।

फैसले में कहा गया है कि एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है और इसके द्वारा तय ब्याज दरें हमेशा अन्य बैंकों की दरों पर प्रभाव डालती हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जब एक समान अप्रोच की बात आती है, तो फिस्कल या टैक्स उपायों से संबंधित कानूनों को अन्य कानूनों की तुलना में अधिक छूट मिलती है।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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