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Holi leave denial workplace india: ऑफिस में गलती से रंग लेकर मत आना, वरना नहीं होगी एंट्री, सैलरी भी कटेगी; वायरल हुआ कंपनी का फरमान

Holi leave denial workplace india: एक कॉर्पोरेट कंपनी ने होली पर कड़े नियम लागू कर दिए, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया। कंपनी ने होली को 'बिजनेस क्रिटिकल डे' बताते हुए छुट्टी लेने पर सैलरी काटने की चेतावनी दी। यहां तक कि रंग लगे होने पर भी कर्मचारियों को ऑफिस में घुसने नहीं दिया जाएगा। इस फैसले की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है।

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होली पर सख्त ऑफिस नियम: ना रंग, ना छुट्टी, ना इमरजेंसी – कर्मचारियों में आक्रोश! (प्रतीकात्मक फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Holi leave denial workplace india: एक कॉर्पोरेट कंपनी ने होली के अवसर पर कर्मचारियों के लिए सख्त नियम लागू किए, जिससे सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया। एक कर्मचारी, साहिल सकुरे, ने रेडिट पर अपने मैनेजर के मैसेज का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। मैसेज में कहा गया कि होली को "बिजनेस क्रिटिकल डे" माना जाएगा, और किसी भी कर्मचारी को बिना पूर्व-अनुमोदन छुट्टी लेने पर गैर-स्वीकृत (unapproved) और बिना वेतन (unpaid) की छुट्टी मानी जाएगी। इतना ही नहीं, कंपनी ने "सैंडविच सैलरी डिडक्शन" पॉलिसी भी लागू की, जिसके तहत अगर कोई कर्मचारी सप्ताहांत या सार्वजनिक अवकाश से पहले या बाद में छुट्टी लेता है, तो उसकी अतिरिक्त सैलरी काटी जाएगी।

रंग खेलने पर ऑफिस में एंट्री नहीं

कंपनी ने यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारी ऑफिस में किसी भी तरह के रंग लेकर न आएं। यदि कोई कर्मचारी रंग लगे हुए आता है, तो उसे अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उसकी गैर-हाजिरी दर्ज की जाएगी। मैनेजर ने कर्मचारियों को चेतावनी दी कि वे बीमार न पड़ें और किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचें।

कर्मचारियों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूटा

इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' करार दिया। एक यूजर ने लिखा, "'आपातकालीन स्थिति से बचें' - भाई, आपातकालीन स्थितियां पहले से तय नहीं होतीं!"

एक अन्य ने कहा, "यह ऑफिस कम, स्कूल ज्यादा लग रहा है।" किसी ने टिप्पणी की, "समूह इस्तीफा ही इसका हल है!"

एक अन्य यूजर ने लिखा, "ऐसा लगता है जैसे कंपनी में मानवता के लिए कोई जगह ही नहीं बची।"

पहले भी सामने आ चुका है 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' का मामला

इससे पहले बेंगलुरु में एक कर्मचारी को दुर्गा पूजा पंडाल में फोन और लैपटॉप पर क्लाइंट मीटिंग अटेंड करते देखा गया था, जिसका वीडियो वायरल हो गया था। ऐसे मामलों से यह सवाल उठता है कि क्या कंपनियां अपने कर्मचारियों की खुशी और संस्कृति का सम्मान करने के बजाय केवल व्यावसायिक लाभ पर ध्यान दे रही हैं?

Ashish Kushwaha
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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