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Share Market विनर्स नहीं लूजर्स गेम, देविना मेहरा ने बताया इसे समझना क्यों जरूरी?

Devina Mehra
Expert view: Devina Mehra

शेयर बाजार विनर्स नहीं लुजर्स गेम है। पहली बार में यह हैरान कर सकता है। लेकिन, जब इस कॉन्सेप्ट को पूरी तरह समझ जाएंगे, तो शायद बाजार में बड़े नुकसान से बच पाएं।

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निवेश को लेकर देविना मेहरा की बड़ी सलाह

Share Market Winners Vs Losers Game Theory : शेयर बाजार में हर इन्वेस्टर अगला मल्टीबैगर ढूंढना चाहता है। ज्यादातर निवेशकों के सिर पर कुछ ही समय में हजार के लाख और लाख के करोड़ बनाने का जुनून सवार है। हर कोई बस ये जानना चाहता है कि कौन सा स्टॉक 5 गुना रिटर्न देगा और किस सेक्टर में अगली बड़ी तेजी आएगी। इन सवालों के जवाब तलाशने में निवेशकों का काफी समय जाता है।

लेकिन फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक और मशहूर निवेशक देविना मेहरा का कहना है कि आज के सूचना प्रधान बाजार में निवेश की असली चुनौती सबसे बड़ा विनर ढूंढना नहीं, बल्कि बड़ी हार से बचना है। उनके मुताबिक इन्वेस्टिंग अब काफी हद तक लूजर गेम (Loser’s Game) है।

‘Loser’s Game’ का मतलब क्या है?

यहां लूजर गेम का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि शेयर बाजार में निवेश करना घाटे का सौदा है, घाटा करने के लिए निवेश करना है। बल्कि, इसका मतलब निवेश की रणनीति में एक बदलाव से है। पहले निवेश जीतने के लिए किया जाता था, अब निवेश यह ध्यान में रखकर किया जाता है कि बड़ा नुकसान नहीं हो जाए।

मेहरा कहती हैं कि पहले बाजार में सीमित जानकारी के दौर में उन इन्वेस्टर्स को बड़ा फायदा मिलता था, जो किसी कंपनी या ट्रेंड के बारे में ऐसी जानकारी जल्दी हासिल कर लेते थे, जो दूसरों के पास नहीं थी। लेकिन, आज स्थिति बदल चुकी है। कंपनी के फाइनेंशियल रिजल्ट, वैल्यूएशन, एनालिस्ट रिपोर्ट, इकोनॉमिक डेटा और मार्केट कमेंट्री जैसी जानकारी काफी आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में केवल सूचना तक पहुंचना कोई बड़ा एडवांटेज नहीं देती। देविना मेहरा के मुताबिक अब ज्यादा अहम यह है कि निवेशक उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करके रिथ् को कैसे कंट्रोल करता है।

50% नुकसान तो वापसी आसान नहीं

Investing में सबसे अहम सबक डाउनसाइड का मैथ है। मान लीजिए किसी निवेशक का पोर्टफोलियो 50% गिर गया। अब उसे अपने बचे हुए पैसे पर 50% नहीं, बल्कि 100% रिटर्न कमाना होगा, तभी वह शुरुआती रकम तक वापस पहुंच पाएगा। इसी तरह 70% की गिरावट के बाद पोर्टफोलिओ को पुराने स्तर पर पहुंचने के लिए करीब 233% रिटर्न चाहिए। यानी बड़ा नुकसान सिर्फ उस समय की वेल्थ कम नहीं करता, बल्कि आगे होने वाली कंपाउंडिंग को भी नुकसान पहुंचाता है। यही वजह है कि लंबे समय के निवेश के लिए कैपिटल प्रोटेक्शन अहम है।

हर मल्टीबैगर पकड़ना जरूरी नहीं

आज सोशल मीडिया पर हर दिन कोई न कोई स्टॉक अगला मल्टीबैगर बताया जाता है। ऐसे माहौल में निवेशक के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सही स्टॉक चुनना नहीं, बल्कि गलत मौके को पहचानकर उससे दूर रहना भी है। कई बार निवेशक किसी गिरते हुए शेयर को सिर्फ इस उम्मीद में पकड़े रहता है कि स्टॉक वापस ऊपर आ जाएगा। लेकिन अगर कंपनी के फंडामेंटल खराब हो चुके हैं, तो केवल खरीद मूल्य पर लौटने का इंतजार पोर्टफोलियो के लिए महंगा साबित हो सकता है। देविना मेहरा का जोर इसी तरह की बड़ी गलतियों से बचने पर है।

शेयर बाजार में असली जीत क्या है?

देविना मेहरा का कहना है कि निवेश में सफलता को केवल इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि आपने कितने बड़े विनर्स पकड़े। बल्कि यह भी देखना चाहिए कि आपने कितने बड़े नुकसान से खुद को बचाया है। अगर कोई निवेशक लगातार बड़े नुकसान से बचता है, अपनी पूंजी को सुरक्षित रखता है और ठीकठाक रिटर्न को लंबे समय तक कंपाउंड होने देता है, तो भी यह बेहतर है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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