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Budget 2026: अब हर कश पड़ेगा महंगा! सिगरेट और तंबाकू पर बढ़ी एक्साइज ड्यूटी, 55 रुपए तक बढ़ गए दाम

बजट 2026 ने धूम्रपान के शौकीनों की जेब पर बड़ा प्रहार किया है। स्वास्थ्य और राजस्व को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी (NCCD) बढ़ाने का कड़ा फैसला लिया है। इस बदलाव के बाद, सिगरेट के विभिन्न ब्रांड्स की कीमतों में ₹55 प्रति पैकेट तक का भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।

cigarettes expensive

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बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य और राजस्व को ध्यान में रखते हुए तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया है। सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नेशनल कैलेमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (NCCD) यानी एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। इस घोषणा के तुरंत बाद बाजार में यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में सिगरेट पीना पहले से कहीं ज्यादा महंगा होने वाला है। आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न ब्रांड्स की सिगरेट के एक पैकेट की कीमत में ₹55 तक का इजाफा देखा जा सकता है। सरकार का यह कदम न केवल राजस्व जुटाने के लिए है, बल्कि इसके पीछे युवाओं को तंबाकू के सेवन से हतोत्साहित करने का सामाजिक उद्देश्य भी छिपा है।

कीमतों पर क्या होगा असर?

सिगरेट की कीमतों में यह बढ़ोतरी उसकी लंबाई और कैटेगरी के आधार पर तय की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 70mm से लेकर 85mm तक की सिगरेट पर लगने वाली ड्यूटी में भारी वृद्धि की गई है। प्रीमियम ब्रांड्स, जो पहले से ही महंगे हैं, उनके एक पैक पर ₹50 से ₹55 तक की सीधी बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, छोटे आकार की सिगरेट या बीड़ी जैसे उत्पादों पर भी टैक्स का कुछ असर देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के बाद सिगरेट कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ेगा, जिसे वे सीधे तौर पर ग्राहकों (Consmuers) से वसूलेंगी। इसका मतलब है कि अब शौकिया तौर पर धूम्रपान करने वालों की मंथली पॉकेट पर बड़ा असर पड़ने वाला है।

राजस्व और स्वास्थ्य का संतुलन

भारत में तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना बजट की एक नियमित परंपरा रही है। सरकार इसे 'पाप कर' (Sin Tax) की श्रेणी में रखती है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने संकेत दिया है कि वह तंबाकू से होने वाली बीमारियों पर होने वाले स्वास्थ्य खर्च की भरपाई इसी टैक्स के जरिए करना चाहती है। तंबाकू के सेवन से होने वाले कैंसर और हृदय रोगों के इलाज के लिए सरकार को भारी निवेश करना पड़ता है। टैक्स में इस वृद्धि से मिलने वाला पैसा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, दूसरी तरफ उद्योग जगत का यह भी तर्क है कि अत्यधिक टैक्स बढ़ने से 'अवैध सिगरेट' (Smuggled Cigarettes) का बाजार बढ़ सकता है, जिस पर कोई टैक्स नहीं मिलता।

आम आदमी और बाजार का रिएक्शन

इस फैसले का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां आईटीसी (ITC) जैसी दिग्गज सिगरेट कंपनियों के शेयरों में हलचल तेज हो गई। आम जनता के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। जहां गैर-धूम्रपान करने वाले और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं मध्यम वर्ग का वह हिस्सा जो नियमित धूम्रपान करता है, इसे महंगाई के दौर में एक और अतिरिक्त बोझ मान रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य तंबाकू मुक्त भारत की दिशा में आगे बढ़ना है और कीमतों में वृद्धि इस दिशा में एक कारगर हथियार साबित हो सकती है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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