बिजनेस

SIP का जादू: 6 साल में ₹1 करोड़, अगले 10 साल में ₹5 करोड़, समझें वेल्थ क्रिएशन का फॉर्मूला

SIP Investment: अधिकांश निवेशक एसआईपी से 1 करोड़ रुपये जुटाना बड़ी उपलब्धि मानते हैं, लेकिन असली चुनौती पहला करोड़ बनाना होती है। इसके बाद अगला करोड़ जल्दी बनता है। लंबी अवधि की SIP में शुरुआती वर्षों में वृद्धि धीमी होती है, पर कंपाउंडिंग के असर से बाद में रिटर्न तेजी से बढ़ते हैं।

Image

SIP से 1 करोड़ तक का सफर (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

SIP Investment : अधिकांश निवेशक मानते हैं कि एसआईपी (SIP) के जरिए 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन असल चुनौती यह पहला करोड़ पाने की होती है। जैसे ही यह लक्ष्य पूरा होता है, अगला करोड़ पहले से कहीं आसान और जल्दी हासिल हो जाता है। लंबी अवधि (10-20 साल) की SIP में शुरुआत के सालों में बढ़त धीमी दिखती है, लेकिन बाद के सालों में रिटर्न तेजी से बढ़ते हैं यही कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) का असर है।

धैर्य बनाम रिटर्न: SIP में क्या जरूरी है?

SIP निवेश में शुरुआती सालों में ज्यादा रिटर्न नहीं दिखते। लेकिन यही वह समय होता है जब आपके निवेश पर मिलने वाले रिटर्न खुद रिटर्न कमाने लगते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई हर महीने ₹10,000 निवेश करता है और उसे 12% वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो 5 साल में यह ₹8 लाख, 10 साल में ₹23 लाख और 20 साल में ₹92 लाख तक बढ़ सकता है।

₹1 लाख मासिक SIP से ₹5 करोड़ तक

  • अगर आप ₹1 लाख प्रति माह SIP करते हैं और 12% रिटर्न मिलता है।
  • 6 साल में बनेगा ₹1.04 करोड़
  • 10 साल में ₹2.24 करोड़
  • 12 साल में ₹3.08 करोड़
  • 14 साल में ₹4.14 करोड़
  • 16 साल में ₹5.46 करोड़
कई निवेशक 7-8 साल में SIP छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बढ़ोतरी धीमी है। लेकिन असली जादू 10 साल के बाद शुरू होता है, जब आपके निवेश पर मिलने वाला ब्याज भी ब्याज कमाने लगता है।

₹30,000 मासिक SIP से ₹5 करोड़ तक

अगर आपकी आमदनी ₹1 लाख महीना है और आप सिर्फ ₹30,000 निवेश कर सकते हैं, तब भी आप ₹5 करोड़ का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। बस समय थोड़ा ज्यादा लगेगा।

  • 12% रिटर्न पर यह लक्ष्य 25 साल में पूरा हो सकता है।
  • 13 साल में ₹1.08 करोड़
  • 18 साल में ₹2.14 करोड़
  • 21 साल में ₹3.1 करोड़
  • 23 साल में ₹4 करोड़
  • 25 साल में ₹5.10 करोड़
पहले ₹1 करोड़ तक पहुंचने में 13 साल लगेंगे, लेकिन अगले ₹4 करोड़ सिर्फ 12 साल में आ जाएंगे। यही कंपाउंडिंग की ताकत है।

अगर SIP हर साल बढ़ाई जाए

अगर आप हर साल अपनी SIP राशि 7% बढ़ाते हैं, तो आपका लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है। ₹30,000 मासिक SIP से शुरू करते हुए 12% रिटर्न पर ₹5 करोड़ पाने में सिर्फ 21 साल लगेंगे।

  • 11 साल में ₹1.05 करोड़
  • 15 साल में ₹2.08 करोड़
  • 18 साल में ₹3.30 करोड़
  • 20 साल में ₹4.42 करोड़
  • 21 साल में ₹5.10 करोड़
यानी सालाना SIP बढ़ाने से आप 4 साल पहले लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

अगर रिटर्न 12% की जगह 14% हो जाए तो?

लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ 2% रिटर्न बढ़ने से भी बड़ा फर्क पड़ता है। अगर ₹30,000 मासिक SIP को 14% रिटर्न मिले तो ₹5 करोड़ का लक्ष्य 25 साल की बजाय 23 साल में पूरा हो जाएगा।

  • 12 साल में ₹1 करोड़
  • 17 साल में ₹2.29 करोड़
  • 19 साल में ₹3.09 करोड़
  • 21 साल में ₹4.05 करोड़
  • 23 साल में ₹5.34 करोड़
पहले 12 साल में ₹1 करोड़ बना, लेकिन अगले 11 साल में ₹5.34 करोड़ यानी कंपाउंडिंग का जादू बाद में दिखता है।

धैर्य और निरंतरता ही सफलता की चाबी

  • जल्दी हार मत मानिए:- SIP शुरू करने के बाद बीच में बंद करने से नुकसान होता है। पहला करोड़ पाना मुश्किल होता है, लेकिन उसके बाद सफर आसान हो जाता है।
  • टाइमिंग नहीं, समय ज्यादा जरूरी:- मार्केट ऊपर-नीचे होता रहेगा, लेकिन नियमित निवेश और धैर्य से ही असली धन बनता है।
  • रिटर्न बढ़ाना भी जरूरी:- थोड़ा बेहतर रिटर्न पाने के लिए अपने निवेश को अलग-अलग फंड्स या एसेट क्लास में बांटें (diversify करें)।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश की सलाह नहीं है, अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो एक्सपर्ट्स से संपर्क करें।)
Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article