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Shiprocket ने IPO के लिए सेबी के पास जमा कराया अपडेटेड ड्राफ्ट, जानें कब आएगा आईपीओ

Shiprocket IPO: शिपरॉकेट अब सिर्फ एक शिपिंग सर्विस प्रोवाइडर नहीं रही है, बल्कि यह D2C ब्रांड्स और MSMEs के लिए एक फुल-स्टैक ई-कॉमर्स इनेबलमेंट प्लेटफॉर्म बन चुकी है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल से सितंबर की अवधि के दौरान कंपनी को 38.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं कंपनी अब शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है

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Shiprocket

लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर की जानी-मानी कंपनी शिपरॉकेट (Shiprocket) अब शेयर बाजार में एंट्री की तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए सेबी के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP-I) दाखिल कर दिया है। इस आईपीओ के जरिए शिपरॉकेट बड़ी रकम जुटाने की में है।

शिपरॉकेट IPO का साइज कितना होगा?

शिपरॉकेट का कुल आईपीओ साइज 2,342.3 करोड़ रुपये का होगा। इसमें दो हिस्से शामिल हैं। पहला, 1,100 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू, जिससे कंपनी को नई पूंजी मिलेगी। दूसरा हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) का है, जिसके तहत मौजूदा शेयरहोल्डर्स 1,242.3 करोड़ रुपये तक के शेयर बेचेंगे।

कंपनी ने इससे पहले मई 2025 में कॉन्फिडेंशियल रूट के जरिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए थे। इन ड्राफ्ट्स को नवंबर में सेबी से मंजूरी मिल चुकी थी। अब कंपनी ने अपडेटेड DRHP दाखिल किया है, जिससे आईपीओ की प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ गई है।

ऑफर फॉर सेल में कौन-कौन बेच रहा शेयर?

ऑफर फॉर सेल में कई शुरुआती निवेशक और फाउंडर्स हिस्सा ले रहे हैं। Bertelsmann Nederland B.V. करीब 85.43 करोड़ रुपये के शेयर बेचेगी। Tribe Capital III करीब 120 करोड़ रुपये और अरविंद लिमिटेड 161 करोड़ रुपये तक के शेयर बेचने की योजना में है।

शिपरॉकेट के कुछ बड़े निवेशक इस ऑफर फॉर सेल का हिस्सा नहीं बनेंगे। Eternal Limited (पहले Zomato Limited), जिसके पास कंपनी की 6.85% हिस्सेदारी है, और Temasek की MacRitchie Investments Pte. Ltd. इस आईपीओ में अपने शेयर नहीं बेचेंगी।

कंपनी के फाउंडर्स भी OFS के जरिए आंशिक एग्जिट लेंगे। फाउंडर साहिल गोयल और गौतम कपूर में से हर एक 144 करोड़ रुपये तक के शेयर बेचेंगे। वहीं, विशेष खुराना करीब 36.93 करोड़ रुपये तक के शेयर ऑफर फॉर सेल में बेचेंगे।

कंपनी प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर भी विचार कर रही है। शिपरॉकेट अपने बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ मिलकर 220 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो उतनी रकम फ्रेश इश्यू साइज से घटा दी जाएगी।

क्या काम करती है शिपरॉकेट?

शिपरॉकेट एक एंड-टू-एंड मर्चेंट-फर्स्ट टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है, जो MSMEs और ऑनलाइन रिटेलर्स को ई-कॉमर्स ऑपरेशन आसान बनाने में मदद करता है। कंपनी ऑर्डर प्रोसेसिंग, शिपिंग, ट्रैकिंग, फुलफिलमेंट और पेमेंट जैसे पूरे सॉल्यूशंस एक ही प्लेटफॉर्म पर देती है।

शिपरॉकेट का बिजनेस दो हिस्सों में बंटा है। कोर बिजनेस में घरेलू शिपिंग प्लेटफॉर्म और ऐप्स शामिल हैं, जबकि इमर्जिंग बिजनेस में क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड, कार्गो, फुलफिलमेंट और चेकआउट सॉल्यूशंस आते हैं। Redseer की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में ऑपरेशंस से होने वाले रेवेन्यू के आधार पर शिपरॉकेट भारत का सबसे बड़ा न्यू-एज एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स इनेबलमेंट प्लेटफॉर्म है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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