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टैरिफ और एक्सपायरी के झटकों से झूला बना बाजार, लाल हुए निफ्टी-सेंसेक्स; इन वजहों से आई गिरावट

Share Market Summary: शेयर बाजार में 13 जनवरी को पूरे दिन तेज उतार-चढ़ाव का दौर रहा। टैरिफ और निफ्टी के एक्सपायरी के झटकों से पूरा बाजार ही झूले की तरफ उपर-नीचे होता रहा। लेकिन, दिन के आखिर में निफ्टी-सेंसेक्स की कमजोर क्लोजिंग ने बता दिया है कि बाजार अब भी बेयर्स के पंजों में फंसा है। Sensex जहां 250 अंक गिरा और Nifty 25,750 के नीचे बंद हुआ है।

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क्यों आई बाजार में गिरावट (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

Share Market Performance Today (आज कैसा रहा शेयर बाजार का प्रदर्शन): मंगलवार को शेयर बाजार ने निवेशकों को दिनभर चौंकाया। ओपनिंग में Sensex और Nifty दोनों हरे निशान में थे, लेकिन कुछ ही घंटों में तेजी का दम टूट गया और बिकवाली ने पूरे बाजार को दबाव में डाल दिया। नतीजा यह रहा कि Sensex दिन के हाई से करीब 933 अंक फिसला और अंत में 250 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। Nifty भी 25,900 के आसपास से फिसलकर 25,750 के नीचे क्लोज हुआ। इस गिरावट में निवेशकों को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

क्लोजिंग बेल पर क्या रहा स्कोर?

दिन के अंत में Sensex 83,627.69 पर बंद हुआ और इसमें 250.48 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। Nifty 25,732.30 पर बंद हुआ और इसमें 57.95 अंकों की कमजोरी रही। बाजार की सबसे बड़ी कहानी यह रही कि इंडेक्स ने दिन के हाई लेवल्स को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन हर उछाल पर बिकवाली ने तेजी को काट दिया। यही वजह है कि आज का सेशन “रैली आई और तुरंत फिसल गई” वाला बन गया।

ट्रंप का टैरिफ बम

आज की गिरावट के पीछे सबसे तेज ट्रिगर बना US President Donald Trump का टैरिफ वाला बयान। ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने के बयान ने ग्लोबल ट्रेड के माहौल को और अनिश्चित बना दिया। बाजार इसे सिर्फ एक ट्रेड पॉलिसी नहीं, बल्कि “टैरिफ को हथियार” बनाने वाली रणनीति के तौर पर देख रहा है। यही वजह है कि निवेशकों ने रिस्क लेने के बजाय सेफ मोड चुना और बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया।

जियोपॉलिटिक्स से क्रूड तक: India के लिए डबल टेंशन

ईरान से जुड़ी कोई भी ट्रेड कार्रवाई सीधे एनर्जी मार्केट की नब्ज पकड़ लेती है। अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है तो क्रूड में वोलैटिलिटी आती है, और भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर देश के लिए यह चिंता बढ़ाने वाली खबर होती है। महंगा क्रूड इन्फ्लेशन को ऊपर धकेल सकता है और कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। यही कारण है कि आज बाजार ने इस संकेत को नेगेटिव लिया और प्रेशर बढ़ गया।

FII बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई बेचैनी

बाजार की गिरावट में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखा। ग्लोबल अनिश्चितता बढ़ते ही FIIs आमतौर पर इमर्जिंग मार्केट्स में एक्सपोजर घटाते हैं और डॉलर की तरफ शिफ्ट होते हैं। इसी दबाव के बीच रुपया भी कमजोर रहा और डॉलर के मुकाबले 90.21 पर बंद हुआ। कमजोर रुपया बाजार के लिए एक और नेगेटिव संकेत बन गया क्योंकि इससे इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने की आशंका रहती है और निवेशक ज्यादा सतर्क हो जाते हैं।

टेक्निकल फ्रंट पर Nifty कमजोर

टेक्निकल तौर पर Nifty ने हाल की गिरावट के बाद रिबाउंड की कोशिश की थी और 25,900 के पास तक गया भी, लेकिन वहीं से प्रॉफिट बुकिंग तेज हो गई। 25,750 के नीचे क्लोजिंग यह दिखाती है कि बाजार अभी भी ऊपरी स्तरों पर मजबूत सप्लाई का सामना कर रहा है। साफ है कि फिलहाल ट्रेडर्स का मूड “Buy the dip” से ज्यादा “Sell on rise” वाला बना हुआ है।

बड़े शेयर भी दबाव में, गिरावट का दायरा चौड़ा

आज की कमजोरी सिर्फ कुछ सेक्टर्स तक सीमित नहीं रही। Trent जैसे शेयरों में तेज गिरावट दिखी और L&T भी दबाव में रहा। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में सिर्फ छोटे शेयर नहीं, बल्कि बड़े और भरोसेमंद नामों में भी निवेशक फिलहाल हल्के हाथ चल रहे हैं। जब हेवीवेट्स टूटते हैं तो इंडेक्स पर दबाव तेजी से बढ़ता है और यही आज दिखा।

आगे क्या देखें: बाजार का मूड किस पर टिकेगा

अब निवेशकों की नजर ग्लोबल ट्रेड डेवलपमेंट, क्रूड के रुख, रुपये की चाल और FII फ्लो पर रहेगी। अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है और डॉलर मजबूत होता है, तो बाजार में दबाव और खिंच सकता है। वहीं अगर ट्रेड वार्ता या पॉलिसी संकेत नरम पड़ते हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है। फिलहाल संकेत यही है कि बाजार एक सीमित दायरे में चॉप्पी रह सकता है और हर तेजी पर बिकवाली का खतरा बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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