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शेयर बाजार में हाहाकार! जनवरी में अब तक सेंसेक्स 2985 अंक टूटा, आगे और कितनी गिरावट?

Share Market Prediction: जनवरी में शेयर बाजार में अब तक का कारोबार भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। एक तरफ जहां महीने की शुरुआत में निफ्टी ने रिकॉर्ड हाई को छुआ और सेंसेक्स भी 85,800 से ऊपर निकल गया। वहीं, अब दोनों इंडेक्स जनवरी के हाई से करीब 3 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहे हैं। तिमाही नतीजे, ग्लोबल हालात और घरेलू स्थितियों को देखते हुए बाजार कहां तक गिर सकता है, जानें इस सवाल के जवाब में क्या है एक्सपर्ट की राय?

Market Prediction

कहां तक गिरेगा बाजार (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

Market Crash or Healthy Correction? ग्लोबल फ्रंट पर ट्रेड वॉर की आशंका, क्रूड की चाल और FII की बिकवाली जैसे फैक्टर्स ने निवेशकों के रिस्क सेंटिमेंट को कमजोर किया है। वहीं, दूसरी तरफ DII की खरीदारी बाजार को नीचे से सपोर्ट दे रही है, जिससे गिरावट “Crash” की बजाय फिलहाल “Controlled Correction” जैसी दिख रही है। ऐसे में आगे का ट्रेंड पूरी तरह इन अहम सपोर्ट लेवल्स पर टिके रहने और 26,000 के ऊपर ब्रेकआउट मिलने पर निर्भर करेगा।

बाजार किस मोड़ पर खड़ा?

जनवरी की शुरुआत में रिकॉर्ड हाई का जोश दिखाने वाला बाजार अब तेज गिरावट के दबाव में है। सेंसेक्स जनवरी के हाई से करीब 2,985 अंक फिसल चुका है और निफ्टी ने भी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 3% से ज्यादा की कमजोरी दिखा दी है। ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह गिरावट सिर्फ शॉर्ट टर्म की प्रॉफिट बुकिंग है या बाजार का ट्रेंड बदल रहा है। फिलहाल चार्ट और फ्लो दोनों संकेत दे रहे हैं कि बाजार करेक्शन मोड में है। लेकिन, साथ ही एक्सपर्ट कह रहे हैं कि मिड टर्म में अब भी “बुल ट्रेंड” कायम है।

सेंसेक्स में गिरावट का पैटर्न

2 जनवरी, 2026 को सेंसेक्स ने 85,812.27 का हाई बनाया था और उसके बाद से बाजार लगातार दबाव में रहा। 16 जनवरी को सेंसेक्स 83,570.35 पर बंद हुआ, यानी हाई लेवल्स से दूरी साफ दिख रही है। जनवरी के पहले पखवाड़े में सेंसेक्स के मूवमेंट में यह संकेत मजबूत हुआ कि रैली टिक नहीं रही, हर उछाल पर सप्लाई आ रही है और बाजार “लोअर टॉप” की तरफ बढ़ रहा है। यही वजह है कि निवेशक सेंटीमेंट कमजोर हुआ है और ट्रेडर्स ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

निफ्टी का मीडियम टर्म स्ट्रक्चर

निफ्टी का 52-वीक हाई 26,373.20 है और 19 जनवरी को यह करीब 25,535 के आसपास ट्रेड करता दिखा। यानी रिकॉर्ड हाई से लगभग 3.18% की गिरावट हो चुकी है। यह गिरावट तेज जरूर है, लेकिन अभी इसे ट्रेंड रिवर्सल कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि निफ्टी अब भी 200-डे मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है। टेक्निकल स्ट्रक्चर के हिसाब से यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल करेक्शन में है, लेकिन मीडियम टर्म में पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।

अब कितना टूटेगा बाजार?

आगे की गिरावट या रिकवरी पूरी तरह निफ्टी के सपोर्ट जोन पर निर्भर है। Choice Broking के टेक्निकल आउटलुक के मुताबिक निफ्टी के लिए 25,600 पहला अहम सपोर्ट है और इसके बाद 25,450 दूसरा बड़ा सपोर्ट माना जा रहा है। अगर निफ्टी इन लेवल्स के ऊपर टिकता है तो बाजार सीमित दायरे में कंसोलिडेशन कर सकता है। लेकिन अगर 25,450 के नीचे कमजोरी बढ़ती है तो करेक्शन का दायरा बड़ा हो सकता है और बाजार अगला सपोर्ट ढूंढने लगेगा।

25,090 का लेवल क्यों अहम?

Geojit के Market Radar में साफ संकेत दिया गया है कि अगर निफ्टी 25,600 के नीचे स्लिप करता है तो 200-डे SMA के पास 25,090 तक गिरावट की संभावना बन सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि VIX में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दिख रही है, यानी वोलाटिलिटी की उम्मीद बढ़ रही है और बाजार में वाइल्ड स्विंग्स हो सकते हैं। इस हिसाब से 25,090 वह लेवल है जहां से बाजार का अगला बड़ा फैसला होगा कि करेक्शन रुकता है या और गहराता है।

सेंसेक्स में कहां रखें नजर?

निफ्टी के सपोर्ट स्ट्रक्चर को सेंसेक्स पर मैप करें, तो 83,200 से 83,000 का जोन पहला सपोर्ट बनता है, क्योंकि हालिया ट्रेडिंग इसी रेंज के आसपास घूम रही है। इसके नीचे 82,800 से 82,600 का जोन अगला सपोर्ट हो सकता है, जो पिछले स्विंग लो के करीब बैठता है। अगर निफ्टी 25,090 की तरफ जाता है तो सेंसेक्स में भी 82,000 के नीचे दबाव बढ़ने की आशंका बन सकती है और तब गिरावट का नैरेटिव सिर्फ करेक्शन से आगे बढ़कर ट्रेंड स्ट्रेस की तरफ जा सकता है।

क्या हैं गिरावट की वजहें?

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल अनिश्चितता और ट्रेड वॉर का डर है। Geojit के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीक विजयकुमा के मुताबिक आने वाले दिन ग्लोबल मार्केट्स के लिए वोलाटाइल रह सकते हैं, क्योंकि ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और यूरोप की संभावित प्रतिक्रिया बाजारों के लिए बड़ा जोखिम बन रही है। अगर टैरिफ और रिटालिएशन की स्थिति बनती है तो ट्रेड वॉर का माहौल ग्लोबल ग्रोथ और रिस्क एसेट्स दोनों के लिए नेगेटिव होगा। यही वजह है कि भारतीय बाजार भी हर उछाल पर कमजोर पड़ रहा है।

इसके अलावा दूसरा बड़ा फैक्टर FII फ्लो है। Choice Broking के मुताबिक 16 जनवरी को FII करीब 4,346 करोड़ रुपये के नेट सेलर रहे, जबकि DII ने करीब 3,935 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे यह साफ होता है कि घरेलू सपोर्ट मौजूद है, लेकिन FII की बिकवाली बनी रही, तो बाजार में रैली टिकना मुश्किल हो सकता है।

ब्रेकआउट के बिना नई तेजी नहीं

Choice Broking के टेक्निकल लेवल्स के मुताबिक निफ्टी के लिए 25,875 के आसपास पहला बड़ा रेजिस्टेंस है और उसके बाद 26,000 और 26,100 के लेवल्स अहम होंगे। जब तक निफ्टी 26,000 के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट नहीं देता, तब तक बाजार में नई ट्रेंडिंग तेजी की उम्मीद कमजोर रहेगी। यही वजह है कि मौजूदा सेटअप में ट्रेडर्स के लिए “रेंज और वोलाटिलिटी” ज्यादा बड़ा फैक्टर है, न कि सीधी तेजी।

निफ्टी को किसने कितनी नीचे खींचा?

निफ्टी की इस गिरावट में सबसे बड़ा रोल FMCG का रहा। Geojit Market Radar के मुताबिक “What drove Nifty?” चार्ट में साफ दिखता है कि निफ्टी की चाल को सबसे ज्यादा ऊपर खींचने वाला स्टॉक Infosys रहा, जिसने करीब +71.2 पॉइंट का सपोर्ट दिया। वहीं निफ्टी को सबसे ज्यादा नीचे खींचने वाला स्टॉक ITC रहा, जिसने करीब -17.8 पॉइंट की नेगेटिव खिंचाई की। यानी कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि निफ्टी में सपोर्ट देने वाली ताकत IT से आई, लेकिन FMCG जैसे डिफेंसिव पैक से दबाव बना और इंडेक्स की रिकवरी कमजोर पड़ गई।

Nifty Support

Nifty Support

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया author

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों... और देखें

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