SEBI on Share Market: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि हाल ही में छोटी और मझोली कंपनियों (Mid & Small Cap) के शेयरों में आई भारी गिरावट पर सेबी को कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।
बुच ने मार्च 2024 में शेयर बाजार के ऊंचे मूल्यांकन पर दी गई चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि जब नियामक को उचित लगा, तब वह इस विषय पर बोल चुका है।
छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों में गिरावट क्यों?
हाल ही में बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगातार 20% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, सेबी प्रमुख का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अतिरिक्त टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है।
मार्च 2024 में दिए गए बयान में सेबी ने कहा था कि "बाजार में झाग के ढेर हैं। कुछ इसे बुलबुला कहते हैं, कुछ झाग... इस झाग को बनने देना उचित नहीं है।" इसका मतलब यह है कि सेबी पहले ही इन शेयरों के अत्यधिक मूल्यांकन को लेकर अपनी चिंता जता चुका था।
म्यूचुअल फंड और SIP पर भी बड़ा बयान
बुच ने स्पष्ट किया कि म्यूचुअल फंड्स में 250 रुपये की व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) को अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं है। इसके अलावा, जब उनसे म्यूचुअल फंड वितरकों द्वारा किसी विशेष योजना पर भारी प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स) देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सेबी इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा। लेकिन अगर किसी योजना में 'गारंटीड रिटर्न' का दावा किया जाता है, तो नियामक जरूर कार्रवाई करेगा।
