Non Banking Financial Companies: देश में काम करने वाले बैंक जिन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को उधार देते हैं, उन्हें ऐसे एनबीएफसी के कर्ज देने के तरीकों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के मैनेजिंग डायरेक्टर सी. एस. शेट्टी ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि NBFC और माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) को बड़े बैंकों की तरह ही जोखिम मूल्यांकन और ऋण निगरानी (Risk Assessment and Credit Monitoring) के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।
डिस्ट्रीब्यूशन और कलेक्शन के लिए अपना सिस्टम फॉलो करते हैं वित्तीय संस्थान
गौरतलब है कि बैंक एनबीएफसी या एमएफआई को उधार देते हैं और आगे कर्ज देने की व्यवस्था उनकी होती है। ये संस्थान कर्ज देने के लिए अपने डिस्ट्रीब्यूशन और कलेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।
बड़ें बैंकों की तरह ही NBFC को भी करना चाहिए नियमों का पालन
SBI के मैनेजिंग डायरेटर शेट्टी ने कहा, ''बैंक जिन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उधार देते हैं, उन्हें ऐसे एनबीएफसी को कर्ज देने के तरीकों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। एनबीएफसी को बड़े बैंकों की तरह ही जोखिम मूल्यांकन और ऋण निगरानी के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जिनसे वे उधार लेते हैं।''
उन्होंने कहा कि बैंकों के कर्ज का एक अच्छा हिस्सा एनबीएफसी और एमएफआई को दिया जाता है, इसलिए जोखिम का अच्छी तरह से आकलन करना चाहिए।
ट्रेड रीप्रेजेंटेटिव के नेटवर्क को ज्यादा सक्षम बनाने पर फोकस
सी. एस. शेट्टी ने कहा कि एक बैंकर का काम जोखिम का आकलन करना, उसे कम करना और उसकी कीमत तय करना है। उन्होंने ये भी कहा कि एसबीआई 65,000 ट्रेड रीप्रेजेंटेटिव के नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा है, बल्कि उन्हें ज्यादा सक्षम बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
भाषा इनपुट्स के साथ
