Sahara Cooperative Society Refund : सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की सहकारी समितियों में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को राहत देते हुए शुक्रवार (12 सितंबर 2025) को एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) को आदेश दिया है कि वह सेबी-सहारा रिफंड खाते से 5,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करे ताकि जमाकर्ताओं को उनका बकाया लौटाया जा सके।
केंद्र सरकार के आवेदन को मिली मंजूरी
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बैंच ने केंद्र सरकार की उस याचिका को मंजूरी दी, जिसमें सेबी-सहारा खाते से राशि जारी करने का अनुरोध किया गया था। यह आदेश 29 मार्च, 2023 को पारित आदेश की ही तर्ज पर है, जिसमें केंद्र के इसी तरह के अनुरोध को स्वीकार किया गया था।
बढ़ाई गई भुगतान की आखिरी तारीख
अदालत ने दिसंबर 2023 में आवंटित 5,000 करोड़ रुपये के वितरण की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर, 2025 से बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दिया है। इससे उन जमाकर्ताओं को समय मिलेगा जो अभी तक अपने दावे प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं।
पैसे ट्रांसफर की प्रक्रिया और निगरानी
कोर्ट ने आदेश दिया है कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर सेबी-सहारा खाते से सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक को हस्तांतरित की जाए। यह प्रक्रिया पूर्व न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी की देखरेख में और मार्च 2023 के आदेश में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पूरी की जाएगी। इस निगरानी प्रक्रिया में 'न्याय मित्र' वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल और सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक सहयोग करेंगे।
जनहित याचिका के आधार पर हुआ फैसला
यह आदेश पिनाक पी. मोहंती द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया गया, जिसमें मांग की गई थी कि विभिन्न चिटफंड और सहारा क्रेडिट कंपनियों में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को उनका धन लौटाया जाए।
अब तक कितनी राशि लौटाई गई?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक 5.43 करोड़ निवेशकों ने 1,13,504.124 करोड़ रुपये का दावा किया है। इनमें से 26,25,090 वास्तविक जमाकर्ताओं को कुल 5,053.01 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। इसके अलावा 13,34,994 निवेशकों ने वेब पोर्टल पर अपने दावे दर्ज किए हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया जारी है। इन दावों की राशि करीब 27,849.95 करोड़ रुपये है।
आगे कितने दावे आने की संभावना?
सरकार का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक करीब 32 लाख अन्य निवेशक अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं, जिन्हें इस धनराशि से भुगतान किया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि: कब शुरू हुआ यह मामला?
यह मामला अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से शुरू हुआ था, जिसमें सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड को निवेशकों का पैसा लौटाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सेबी-सहारा एस्क्रो खाता बनाया गया, जिससे अब तक कई जमाकर्ताओं को भुगतान किया जा चुका है।
