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731666404000…ये नंबर नहीं रकम है! मुकेश अंबानी को 7.3 लाख करोड़ का झटका; अब Q3 नतीजे पर टिकी नजर

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की दौलत को इस साल का सबसे बड़ा झटका लगा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई गिरावट के चलते उनकी नेटवर्थ में करीब 7.3 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के Q3 तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है, जो आगे शेयरों की दिशा तय कर सकते हैं।

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Mukesh ambani

एशिया के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी को हाल ही में बड़ा झटका है, उनकी दौलत में में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अब 100 बिलियन डॉलर के क्लब से बाहर हो गए हैं। उनकी कुल संपत्ति घटकर 99.6 बिलियन डॉलर रह गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ समय पहले तक अंबानी भारत और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति होने के साथ-साथ दुनिया के टॉप अमीरों की सूची में मजबूती से बने हुए थे।

कितनी आई गिरावट?

इस साल मुकेश अंबानी की नेट वर्थ में करीब 8.12 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम लगभग 7.32 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हालिया कमजोरी मानी जा रही है। जैसे-जैसे शेयरों में दबाव बढ़ा, वैसे-वैसे अंबानी की निजी संपत्ति पर भी असर दिखने लगा।

शेयरों में गिरावट

हाल ही में बीते मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। इस एक दिन की गिरावट से ही मुकेश अंबानी की संपत्ति में करीब 2.07 बिलियन डॉलर की कमी आ गई। हालांकि अगले दिन यानी बुधवार को शेयरों में हल्की रिकवरी देखने को मिली। बुधवार सुबह करीब 11 बजे रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 0.86 प्रतिशत की तेजी के साथ 1464.05 रुपये पर कारोबार करते नजर आए।

कितना है रिलायंस का मार्केट कैप?

फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप घटकर 19,81,221.66 करोड़ रुपये रह गया है। कंपनी के शेयरों का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 1,611.20 रुपये रहा है, जबकि इसका न्यूनतम स्तर 1,115.55 रुपये रहा है। इससे साफ है कि बीते एक साल में शेयरों ने काफी उतार-चढ़ाव देखा है, जिसका सीधा असर निवेशकों और प्रमोटर की संपत्ति पर पड़ा है।

अगर दुनिया के अमीरों की लिस्ट में नुकसान उठाने वालों की बात करें, तो मुकेश अंबानी इस साल दूसरे सबसे बड़े लूजर बनकर उभरे हैं। उनसे आगे सिर्फ मेटा प्लेटफॉर्म्स के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हैं, जिनकी नेट वर्थ में इस साल करीब 9.84 बिलियन डॉलर की गिरावट आई है। इसके बावजूद जुकरबर्ग की कुल संपत्ति अभी भी 223 बिलियन डॉलर के आसपास है और वह दुनिया के अमीरों की सूची में छठे स्थान पर बने हुए हैं।

कौन है दुनिया का सबसे अमीर शख्स?

वहीं दूसरी तरफ ब्लूमबर्ग की सबसे अमीर लोगों की सूची में पहले नंबर पर एलन मस्क का नाम है। इस साल एलन मस्क की दौलत में करीब 20.9 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है और उनकी कुल संपत्ति बढ़कर लगभग 640 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। भारतीय कारोबारी गौतम अडानी की बात करें तो वह 81 बिलियन डॉलर की नेट वर्थ के साथ इस सूची में 21वें स्थान पर बने हुए हैं।

अब इस चीज पर निवेशकों की नजर

मुकेश अंबानी की नेट वर्थ और रिलायंस के शेयरों में आई गिरावट के बीच अब निवेशकों की नजर कंपनी के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने अक्टूबर-दिसंबर यानी तीसरी तिमाही के नतीजे शुक्रवार, 16 जनवरी को जारी करने वाली है। माना जा रहा है कि ये नतीजे शेयरों की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कंपनी के रेवेन्यू में पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। EBITDA में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह आंकड़ा 47,997 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पिछली तिमाही में यह 45,885 करोड़ रुपये था। ऑपरेटिंग मार्जिन के 18 प्रतिशत से बढ़कर 18.7 प्रतिशत होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 18,165 करोड़ रुपये से बढ़कर 19,271 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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