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RBI बैंकों में कैश बढ़ाने के लिए करेगा ये काम, ऐसे आएंगे लाखों करोड़ रुपये

Bank Cash Liquidity: भारतीय रिजर्व बैंक ने घोषणा की कि वह बैंकों में कैश बढ़ाने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। इसके साथ ही वह 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर-रुपया अदला-बदली नीलामी भी आयोजित करेगा। यह कदम बैंकिंग सिस्टम में तरलता बनाए रखने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

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आरबीआई का बड़ा कदम: बैंकों में नकदी बढ़ाने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये डालेगा (तस्वीर-istock)

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Bank Cash Liquidity : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी (लिक्विडिटी) बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि वह खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों (सरकारी बॉन्ड) की खरीद करेगा और साथ ही डॉलर-रुपया अदला-बदली (स्वैप) नीलामी भी आयोजित करेगा। इस कदम का मकसद बैंकों के पास पर्याप्त कैश बनाए रखना और वित्तीय बाजारों को स्थिर रखना है।

क्या है आरबीआई की नई घोषणा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने मंगलवार को जानकारी दी कि वह कुल 2 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। यह खरीद ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत की जाएगी। इसके अलावा, रिजर्व बैंक 10 अरब अमेरिकी डॉलर की डॉलर-रुपया खरीद-बिक्री अदला-बदली नीलामी भी करेगा। इन दोनों उपायों को 29 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

ओएमओ क्या होता है और क्यों जरूरी है

ओएमओ यानी ओपन मार्केट ऑपरेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें आरबीआई बाजार से सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है। जब आरबीआई बॉन्ड खरीदता है, तो बैंकों के पास नकदी बढ़ती है। जब बॉन्ड बेचता है, तो नकदी कम होती है। इस बार आरबीआई बॉन्ड खरीद रहा है, यानी उसका साफ संकेत है कि वह बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ाना चाहता है ताकि कर्ज देने की क्षमता बनी रहे और ब्याज दरों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

चार चरणों में होगी 2 लाख करोड़ की खरीद

आरबीआई ने बताया कि सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद कुल 4 किस्तों में की जाएगी। हर किस्त 50,000 करोड़ रुपये की होगी।

खरीद की तारीखें इस प्रकार हैं:-

  • 29 दिसंबर 2025
  • 5 जनवरी 2026
  • 12 जनवरी 2026
  • 22 जनवरी 2026
इस तरह कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपये की नकदी बैंकिंग सिस्टम में डाली जाएगी।

डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी का क्या मतलब है

आरबीआई ने यह भी घोषणा की है कि वह 13 जनवरी 2026 को तीन साल की अवधि के लिए 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया खरीद/बिक्री अदला-बदली नीलामी आयोजित करेगा। इस प्रक्रिया में बैंक आरबीआई को डॉलर बेचेंगे। बदले में उन्हें रुपये मिलेंगे। तीन साल बाद वही बैंक उतनी ही मात्रा में डॉलर वापस खरीदेंगे। इससे बाजार में रुपये की उपलब्धता बढ़ती है और विदेशी मुद्रा बाजार में भी स्थिरता बनी रहती है।

हाल की घोषणाओं से जुड़ा है यह फैसला

यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले ही आरबीआई ने 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की ओएमओ खरीद और 5 अरब डॉलर की तीन साल की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी की घोषणा की थी। लगातार हो रही इन घोषणाओं से साफ है कि आरबीआई तरलता की स्थिति को लेकर सतर्क है और जरूरत पड़ने पर सक्रिय कदम उठा रहा है।

आरबीआई की नजर बाजार की हर हलचल पर

केंद्रीय बैंक ने अपने बयान में कहा कि वह नकदी की स्थिति और बाजार की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखेगा। अगर भविष्य में और उपायों की जरूरत पड़ी, तो आरबीआई उन्हें भी समय पर लागू करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बैंकों को राहत मिलेगी, कर्ज वितरण सुचारू रहेगा और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहेगी। कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम अर्थव्यवस्था को सहारा देने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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