Sovereign Gold Bond : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2017-18 सीरीज-XIII के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन (समय से पहले भुनाने) की कीमत का ऐलान किया। इस बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को अब तक करीब 382 प्रतिशत का शानदार रिटर्न मिला है। यह रिटर्न सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का नतीजा है।
कितने दाम पर भुनाया जा सकेगा बॉन्ड
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई के अनुसार, 26 दिसंबर 2017 को जारी किए गए एसजीबी 2017-18 सीरीज-XIII को अब 13,563 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर प्रीमैच्योर रूप से भुनाया जा सकता है। आमतौर पर एसजीबी की मैच्योरिटी अवधि आठ साल की होती है, लेकिन निवेशकों को पांच साल पूरे होने के बाद इसे समय से पहले भुनाने का विकल्प मिलता है। जो निवेशक चाहें, वे इसे मैच्योरिटी तक होल्ड भी कर सकते हैं।
जारी कीमत और मिला जबरदस्त रिटर्न
यह सीरीज 2017 में 2,866 रुपये प्रति ग्राम (बिना किसी डिस्काउंट के) की कीमत पर जारी की गई थी। मौजूदा प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन कीमत के आधार पर निवेशकों को करीब 381.6 प्रतिशत का रिटर्न मिल रहा है। यह रिटर्न सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने से मिला है।
2.5% सालाना ब्याज का अतिरिक्त फायदा
एसजीबी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशकों को सोने की कीमत बढ़ने के साथ-साथ 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलता है। यह ब्याज हर साल निवेशक के खाते में जमा होता है। अगर इस ब्याज को भी कुल रिटर्न में जोड़ दिया जाए, तो एसजीबी से मिलने वाला कुल फायदा और भी ज्यादा हो जाता है।
क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार द्वारा समर्थित सिक्योरिटीज होती हैं, जिनकी कीमत सोने के ग्राम के हिसाब से तय होती है। इन्हें फिजिकल सोना खरीदने के डिजिटल और सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इनमें न तो सोना रखने का झंझट होता है और न ही चोरी या शुद्धता की चिंता। सोने की कीमत जैसे-जैसे बढ़ती है, वैसे-वैसे एसजीबी की वैल्यू भी बढ़ती जाती है।
टैक्स से जुड़ा बड़ा फायदा
एसजीबी में निवेश करने पर टैक्स के लिहाज से भी फायदा मिलता है। अगर निवेशक बॉन्ड को मैच्योरिटी तक या कम से कम पांच साल तक होल्ड करता है, तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होता। हालांकि, ब्याज से होने वाली आय पर टैक्स नियमों के अनुसार लागू होता है।
सोने की कीमतों में तेजी की वजह
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला है। इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सोना-चांदी के ईटीएफ में बढ़ी खरीदारी जैसे कारण हैं। जानकारों का मानना है कि आगे भी सोने की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना ऑल-टाइम हाई पर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के दाम ऑल-टाइम हाई स्तर के आसपास बने हुए हैं। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 0.73 प्रतिशत बढ़कर 4,536 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की कमजोर होती साख सोने को आगे भी सहारा दे सकती है।
