राजस्थान में देश की पहली ऐसी सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी, जो बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर के स्तर पर काम करेगी। इस प्रायोगिक परियोजना की शुरुआत जयपुर में जयपुर डिस्कॉम और ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (जीईएपीपी) मिलकर करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली की अधिकतम मांग को नियंत्रित करने, आपूर्ति बेहतर बनाने और सौर ऊर्जा का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने में बैटरी तकनीक की उपयोगिता का आकलन करना है।
दोनों संस्थाओं ने बुधवार को जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र स्थित केएल सैनी स्टेडियम में 250 किलोवाट क्षमता और 250 किलोवाट-घंटे ऊर्जा भंडारण वाली बैटरी प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए। यह घोषणा बिजली वितरण कंपनियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन की गई।
बिजली की मांग और सौर ऊर्जा पर होगा परीक्षण
PTI/भाषा के मुताबिक इस परियोजना के तहत यह जांच की जाएगी कि सोडियम-आयन बैटरियां स्थानीय स्तर पर बिजली की बढ़ती मांग को संभालने में कितनी मददगार हैं। साथ ही, छतों पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्रों से दिन के समय पैदा होने वाली बिजली को बैटरी में जमा करके जरूरत के समय इस्तेमाल करने की संभावनाओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
बैटरी प्रणाली को बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर के पास स्थापित किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि उपभोक्ताओं के नजदीक बिजली का भंडारण करने से अधिक मांग के समय बिजली की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने और ट्रांसफॉर्मर पर दबाव कम करने में कितनी मदद मिल सकती है।
लिथियम-आयन बैटरी का विकल्प तलाशने की पहल
परियोजना में राजस्थान की जलवायु परिस्थितियों में सोडियम-आयन तकनीक के प्रदर्शन का भी आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियों के विकल्प के रूप में इस तकनीक की क्षमता को समझना है। इसके परिणाम भविष्य में बिजली भंडारण की नई व्यवस्थाएं विकसित करने में उपयोगी हो सकते हैं।
अन्य राज्यों को भी मिलेगा फायदा
जयपुर डिस्कॉम परियोजना के लिए जगह, तकनीकी कर्मचारी और परिचालन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराएगा। वहीं, जीईएपीपी बैटरी प्रणाली के डिजाइन, प्रदर्शन की निगरानी, तकनीकी सहायता और डिस्कॉम के इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने में सहयोग करेगा।
राजस्थान सरकार की ऊर्जा सचिव एवं डिस्कॉम अध्यक्ष आरती डोगरा ने कहा कि बिजली की अधिकतम मांग का असर सबसे पहले वितरण ट्रांसफॉर्मर पर पड़ता है। इस परियोजना से बैटरी भंडारण के जरिए ट्रांसफॉर्मर पर दबाव घटाने और बिजली वितरण नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ाने की संभावनाओं का पता चलेगा। दोनों संस्थाएं इसके निष्कर्ष देश की अन्य बिजली वितरण कंपनियों के साथ भी साझा करेंगी। इससे दूसरी कंपनियां भी अपने नेटवर्क में इस तकनीक को अपनाने की उपयोगिता का आकलन कर सकेंगी।
