Promoters Selling Share: 2025 में भारतीय बाजार में प्रमोटर्स की बिकवाली 1.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। Bharti Airtel, IndiGo जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रमोटर्स की तरफ से इस साल भारी बिकवाली देखने को मिली है। ऐसे में आम निवेशकों के दिमाग में यह सवाल बार-बार आ रहा है कि क्या यह बाजार के महंगे वैल्यूएशन का संकेत है या प्रॉफिट बुकिंग। आखिर निवेशकों के लिए यह ट्रेंड क्या मायने रखता है जानें।
प्रमोटर बिकवाली ने तोड़ा रिकॉर्ड
भारतीय शेयर बाजार में 2025 के दौरान प्रमोटर्स की ओर से की गई शेयर बिक्री ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब तक प्रमोटर्स 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बाजार में बेच चुके हैं। यह आंकड़ा 2024 के 1.43 लाख करोड़ रुपये के पिछले रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। खास बात यह है कि यह लगातार तीसरा साल है, जब प्रमोटर्स की तरफ से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की गई है।
किस तरह बेचे गए शेयर
ET की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में ज्यादातर बिक्री ब्लॉक और बल्क डील्स के जरिए हुई है। करीब 352 डील्स के माध्यम से लगभग 1.35 लाख करोड़ के शेयर बेचे गए हैं। जबकि, ऑफर फॉर सेल यानी OFS रूट से 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हिस्सेदारी बेची गई है।
प्रमोटर हिस्सेदारी 8 साल के निचले स्तर पर
रिकॉर्ड बिकवाली का असर प्रमोटर होल्डिंग पर साफ दिख रहा है। जून 2025 तक भारतीय शेयर बाजार में निजी प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर 40.58% रह गई है, जो पिछले आठ साल का निचला स्तर है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में ओनरशिप स्ट्रक्चर तेजी से बदल रहा है और प्रमोटर्स बड़े पैमाने पर कैश आउट कर रहे हैं।
किन कंपनियों में हुई सबसे ज्यादा बिकवाली
2025 में सबसे ज्यादा प्रमोटर बिकवाली करने वालों में बड़े कॉरपोरेट नाम शामिल हैं। Bharti Airtel में प्रमोटर्स ने करीब 44,682 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इसके बाद IndiGo के प्रमोटर्स ने 14,497 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। AWL Agri Commodities के प्रमोटर्स ने 11,064 करोड़ रुपये और Vishal Megamart के प्रमोटर्स ने 10,220 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इनके अलावा इसके अलावा Bajaj Finserv, Mphasis, Hindustan Zinc, Dixon, KFin Tech और Bajaj Housing Finance जैसे स्टॉक्स में भी 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रमोटर सेल दर्ज की गई है।
क्या बाजार महंगा हो चुका है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रमोटर बिकवाली का यह ट्रेंड इस बात की ओर इशारा करता है कि बाजार के कई सेगमेंट में वैल्यूएशन काफी महंगे हो चुके हैं। खासतौर पर स्मॉल-कैप शेयरों में प्रमोटर एक्टिविटी ज्यादा देखने को मिली है। प्रमोटर्स ने जिन कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई है, उनमें बड़ी संख्या स्मॉल-कैप स्टॉक्स की है।
क्या है एक्सपर्ट का व्यू
रिपोर्ट में JM Financials वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के हवाले से बताया गया है कि हर प्रमोटर बिकवाली को निगेटिव संकेत नहीं माना जाना चाहिए। प्रमोटर्स कई वजहों से शेयर बेचते हैं, जैसे कर्ज घटाना, भविष्य की योजनाओं के लिए पूंजी जुटाना, पारिवारिक सेटलमेंट या नियामकीय जरूरतें। मोटे तौर पर फिलहाल बाजार में वैल्यूएशन महंगे हैं, इस लिहाज से प्रमोटर अपनी वर्षों की मेहनत को प्रॉफिट में बदल रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे सिर्फ प्रमोटर बिकवाली के आंकड़े देखकर फैसला न लें। यह देखना ज्यादा अहम है कि बिक्री के बाद प्रमोटर के पास कितनी हिस्सेदारी बची है और कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं या नहीं। अगर प्रमोटर हिस्सेदारी घटने के साथ कंपनी की कमाई और ग्रोथ पर भी दबाव दिखे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। लेकिन मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में सीमित प्रमोटर सेल को सिर्फ मुनाफावसूली के तौर पर भी देखा जा सकता है।
