Crude Oil Price vs Petrol-Diesel Margins : वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी के चलते देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के फिर से 'अच्छे दिन' लौट आए हैं।ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (JP Morgan) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंबाइंड मार्केटिंग मार्जिन अब पश्चिम एशिया संकट के शुरू होने से पहले के स्तर से भी ऊपर निकल गया है।
मार्जिन की रिकवरी का पूरा गणित
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ने के बाद भारत में भी डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए। हालांकि, दावों के मुताबिक मई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियां अपनी वास्तविक लागत वसूल नहीं पा रही थीं और घाटे में चल रही थीं। अब जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी हुई हैं और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हुआ है, इन कंपनियों का कंपोजिट मार्जिन संकट से पहले वाले दौर को पार कर गया है। लिहाजा, अब उम्मीद की जा रही है कि मई में पेट्रोल-डीजल के दाम में जो बढ़ोतरी हुई थी, उसे अब वापस लिया जा सकता है।
अभी सरकार पर कितना बोझ?
तेल कंपनियों के मार्जिन में आए इस शानदार सुधार के पीछे सबसे बड़ा हाथ केंद्र सरकार टैक्स नीति का है। सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में ₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती की थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने के बावजूद देश में रिटेल कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। इस कटौती की वजह से रिटेल कीमतों का एक बड़ा हिस्सा सीधे तेल कंपनियों के खाते में जा रहा है, जिससे उनका मार्केटिंग इकोनॉमिक्स मजबूत हुआ है। हालांकि, जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान खींचा है कि एक्साइज ड्यूटी में इस राहत से सरकार को सालाना करीब ₹1.8 लाख करोड़ के राजस्व (Revenue) का नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि लंबी अवधि में इस मुनाफे की निरंतरता को लेकर बाजार थोड़ा सतर्क है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें पूरी तरह स्थिर होने पर सरकार दोबारा एक्साइज ड्यूटी बढ़ा सकती है।
इन्वेंट्री लॉस की रिकवरी पर जोर
रिपोर्ट में सेक्टर को लेकर दो बड़ी चिंताओं की बात की है। पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान हुए घाटे (Under-recoveries) को पाटने के लिए सरकारी तेल कंपनियों पर कर्ज (Material Debt) का बोझ काफी बढ़ गया है, जो आने वाले समय में इनके वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे दबाव में रह सकते हैं। क्योंकि, क्रूड की कीमतों में अचानक आई इस गिरावट की वजह से कंपनियों को भारी इन्वेंट्री लॉस (पुराने महंगे स्टॉक की वैल्यू घटना) उठाना पड़ सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) से इन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी में वास्तविक और बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
आईओसीएल और बीपीसीएल रेस में आगे
ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बनी रहती हैं और रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत रहता है, तो अल्पावधि में इंडियन ऑयल (IOCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) का मार्जिन भी संकट के पहले के स्तर को पार कर चुका है, लेकिन कंबाइंड रिफाइनिंग और मार्केटिंग इकोनॉमिक्स के मामले में IOCL और BPCL ज्यादा बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वित्त वर्ष 2028 (FY28) के बाद के लिए फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन पर बहुत स्पष्टता नहीं है, इसलिए निवेशकों को इस सेक्टर में किसी भी बड़े निवेश से पहले क्रूड की चाल और सरकारी टैक्स नीतियों पर लगातार नजर रखनी होगी।
क्या आम आदमी को मिलेगी राहत?
ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल आम आदमी के लिए राहत की उम्मीद कम है। क्योंकि कंपनियां सबसे पहले महंगे क्रूड के दौर में चढ़े अपने पुराने भारी कर्ज (Accumulated Debt) को चुकाकर अपनी बैलेंस शीट सुधारने पर जोर देंगी। इसके अलावा घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) पर हो रहे नुकसान की भरपाई करेंगी। इसके अलावा सरकार ने संकट के समय जो उत्पाद शुल्क (Excise Duty) घटाया था, उसे फिर से बढ़ाया जा सकता है, जिसके बाद कंपनियों के पास रिटेल यूजर्स के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने की गुंजाइश नहीं बचेगी। हालांकि, सरकार एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाती है, तो कंपनियां आम लोगों को राहत दे सकती हैं।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें : Hormuz खुलने से आपकी जेब को मिल सकती है राहत, 40% तक घट सकते हैं LNG के दाम
