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12 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम! जानिए अब तक कुल कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल और CNG

पिछले 12 दिनों में चौथी बार Petrol Diesel और CNG के दाम नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं । जहां पेट्रोल-डीजल करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हुए हैं, वहीं इस बढ़ोतरी से आम जनता की जेब पर भारी बोझ बढ़ा है ।

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12 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम! जानिए अब तक कुल कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल और CNG

ऑयल पेट्रोलियम कंपनियों को भारी नुकसान और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर उपजे ऊर्जा संकट (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान) के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल डीजल (Petrol Diesel) की महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है । पिछले 12 दिनों के भीतर देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस लगातार हो रहे मूल्य संशोधन के कारण आम जनता, नौकरीपेशा वर्ग और माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स का मासिक बजट पूरी तरह से डगमगा गया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा हाल ही में की गई इस चरणबद्ध बढ़ोतरी के बाद देश के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे घरेलू बाजार में चौतरफा महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में आइए जानते हैं 12 दिन पेट्रोल डीजल और CNG का रेट कितना बढ़ गया है.

12 दिन में इतना महंगा हुआ पेट्रोल डीजल और CNG

अगर पिछले 12 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में हुई कुल बढ़ोतरी के गणित को समझें, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा चुकी है । इंडियन ऑयल से मिले आंकड़े के मुताबिक, बीते 15 मई से तेल की कीमतों में संशोधन का सिलसिला दोबारा शुरू हुआ है। एक छोटे अंतराल के बाद शुरू हुई इस बढ़ोतरी से अब तक पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। इसके अलावा, सीएनजी (CNG) भी अछूती नहीं रही है और इसके दामों में भी बीते 10 दिन में 4 रुपए प्रति किलोग्राम की क्रमिक बढ़ोतरी की गई है । इस संयुक्त मूल्य वृद्धि का सीधा असर न सिर्फ दोपहिया और चौपहिया वाहन चालकों पर पड़ रहा है, बल्कि ऑटो और कैब चालकों की दैनिक कमाई भी प्रभावित हो रही है।

अलग अलग राज्यों में अलग क्यों है कीमतें?

इस समय पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक समान नहीं हैं । केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise) तो पूरे देश में एक बराबर रहता है, लेकिन राज्यों में पंप की कीमतें वहां की राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर यानी वैट (VAT) के कारण पूरी तरह बदल जाती हैं । उदाहरण के तौर पर, देश में सबसे महंगा पेट्रोल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में बिक रहा है, जहां पेट्रोल की कीमत 112 रुपये से लेकर 117.8 रुपये प्रति लीटर के बीच पहुंच चुकी है । इसका मुख्य कारण यह है कि ये राज्य 30 से 35 प्रतिशत तक का भारी वैट, प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस वसूलते हैं । इसके विपरीत, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में वैट की दरें कम होने के कारण पेट्रोल अब भी 99 रुपये से 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है ।

भारत में अब भी सस्ता है पेट्रोल डीजल

वैश्विक संदर्भ में देखा जाए तो भारत में ईंधन की यह बढ़ोतरी दुनिया के अन्य बड़े देशों के मुकाबले काफी कम और नियंत्रित है । जहां होर्मुज संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका, पाकिस्तान, म्यांमार और यूरोपीय देशों ने अपने यहाँ ईंधन की कीमतों में 20 से लेकर 90 प्रतिशत तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी की है, वहीं भारत ने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव को खुद झेलकर घरेलू कीमतों को स्थिर बनाए रखा । केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने उत्पाद शुल्क में कटौती करके और दैनिक घाटे (under-recoveries) को खुद वहन करके आम उपभोक्ताओं को एक बहुत बड़े प्राइस शॉक से बचाया है । हालांकि, लगातार बढ़ते इनपुट कॉस्ट के कारण अब तेल कंपनियों को आंशिक तौर पर यह बोझ खुदरा कीमतों के रूप में जनता पर डालना पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में माल भाड़ा और दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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