Education Loan Tips: एजुकेशन लोन पूरे भारत में छात्रों की उच्च शिक्षा में अहम भूमिका निभाता है। वैसे भी आज के समय में जैसे-जैसे शिक्षा की लागत बढ़ती जा रही है, एजुकेशन लोन की अहमियत भी बढ़ती चली जा रही है। इससे छात्रों को हायर स्टडीज करने और अपने करियर के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती है। छात्रों की शैक्षिक आकांक्षा को पूरा करने के लिए बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस एजुकेशन लोन देते हैं। यदि आप एजुकेशन लोन लेने की तैयारी में हैं तो आपको कुछ अहम पॉइंट्स पर ध्यान चाहिए।
कैसे तय होती है लोन राशि
अलग-अलग आर्थिक बैंकग्राउंड वाले छात्र भारत या विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लोन राशि कोर्स फी, संस्थान की प्रतिष्ठा और आवेदक की वित्तीय परिस्थितियों के आधार पर तय की जाती है।
ब्याज दर
एजुकेशन लोन पर ब्याज दरें बैंक, लोन राशि और मौजूदा बाजार स्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। कई बैंक छात्रों को रियायती ब्याज दरें ऑफर करते हैं। इसलिए ऐसी जगह से लोन लें, जहां कम ब्याज दर हो।
लोन कब चुकाना होता है
एजुकेशन लोन की रिपेमेंट आमतौर पर कोर्स पूरा होने के बाद शुरू होती है। कुछ बैंक छूट अवधि की पेशकश करते हैं, जिससे उधारकर्ताओं को रिपेमेंट शुरू करने से पहले जॉब सिक्योर करने की अनुमति मिलती है।
टैक्स बेनेफिट
छात्र की आवश्यकताओं और वित्तीय जरूरतों के अलावा एजुकेशन लोन के कई लाभ हैं। आपको अपना एजुकेशन लोन चुकाने पर आयकर अधिनियम की धारा 80ई के तहत छूट मिलती है।
नियम और शर्तें
अलग-अलग बैंक में एजुकेशन लोन से जुड़े विभिन्न नियम और शर्तें हो सकती है। इसलिए सभी नियम और शर्तों को ध्यान से जान लें। इनमें सभी के चार्जेस शामिल हैं।
