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तेल कंपनियों की बढ़ी टेंशन! आखिर कब तक घाटे में बिकेगा पेट्रोल-डीजल और गैस?

कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भारतीय तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर हो रहे रोजाना करोड़ों के घाटे के बीच अब सवाल उठ रहा है कि क्या जल्द ही कीमतें बढ़ने वाली हैं?

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Oil Companies Loss

भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए मौजूदा समय काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने इन कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगाड़ दी है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कंपनियों को रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान लगाया जा रहा है. वैश्विक उथल-पुथल और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के दबाव ने कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

कच्चे तेल में उछाल

तेल कंपनियों के इस भारी नुकसान की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ना है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में जरा सी भी बढ़ोतरी का सीधा असर यहाँ की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पिछले कुछ समय से भू-राजनीतिक तनाव और मांग में बढ़ोतरी के कारण कच्चे तेल की कीमतें कंपनियों की 'ब्रेक-इवन' लागत से काफी ऊपर चली गई हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ती हैं और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाते, तो कंपनियों को होने वाले इस अंतर को 'अंडर-रिकवरी' या घाटा कहा जाता है।

क्या बढ़ेंगी पेट्रोल और डीजल की कीमतें?

आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाएंगे? कंपनियां लंबे समय तक इस स्तर का घाटा सहन नहीं कर सकतीं, क्योंकि इसका सीधा असर उनके भविष्य के निवेश और विस्तार योजनाओं पर पड़ता है। हालांकि, तेल की कीमतें बढ़ाना एक संवेदनशील राजनीतिक फैसला भी होता है, खासकर चुनाव या त्योहारों के समय। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में तेल कंपनियां कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी करने का विचार कर सकती हैं ताकि आम जनता पर एक साथ बड़ा बोझ न पड़े।

रसोई गैस पर भी बढ़ रहा है दबाव

सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि रसोई गैस (LPG) की कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। सरकार उज्ज्वला योजना और अन्य माध्यमों से सब्सिडी प्रदान करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती लागत तेल कंपनियों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। घरेलू गैस सिलेंडरों के दाम लंबे समय से स्थिर रखे गए हैं, लेकिन बढ़ती लागत के कारण कंपनियों को मिलने वाला मार्जिन खत्म हो गया है। कंपनियों का मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह घाटा उनके वित्तीय प्रदर्शन को पूरी तरह से प्रभावित कर सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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