Indian Railway दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और यहां 'वेटिंग लिस्ट' (Waiting Ticket) यात्रियों के लिए हमेशा से एक सिरदर्द रही है। टिकट बुक करते समय सबसे बड़ा संशय यही होता है कि अंत में सीट कन्फर्म होगी या नहीं। यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए रेलवे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का सहारा ले रहा है। रेलवे एक ऐसा एडवांस मॉडल विकसित कर रहा है जो यात्रियों को उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की सटीक संभावना बताएगा।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
रेलवे का यह नया AI मॉडल केवल एक साधारण अनुमान नहीं होगा, बल्कि यह पिछले कई वर्षों के विशाल डेटा का विश्लेषण करेगा। यह सिस्टम देखेगा कि किसी खास ट्रेन में, किसी खास मौसम या त्योहार (जैसे होली, दिवाली) के दौरान वेटिंग टिकट कन्फर्म होने का पुराना ट्रेंड क्या रहा है। इसके अलावा, यह रियल-टाइम में कैंसिलेशन रेट और उपलब्ध सीटों का तालमेल बिठाकर आपको एक 'प्रोबेबिलिटी' (संभावना) प्रतिशत में बताएगा। मान लीजिए अगर सिस्टम कहता है कि आपके कन्फर्म होने के चांस 90% हैं, तो आप निश्चिंत होकर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।
यात्रियों के लिए इसके बड़े फायदे
इस तकनीक के आने से यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा अपनी यात्रा की बेहतर प्लानिंग करने में होगा। यदि किसी यात्री को पता चलता है कि उसकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने के चांस बहुत कम हैं, तो वह समय रहते 'विकल्प' (Vikalp) स्कीम का चुनाव कर सकता है या किसी अन्य ट्रेन या परिवहन के माध्यम की तलाश कर सकता है। इससे अंतिम समय पर होने वाली आपाधापी और दलालों के चंगुल से बचने में मदद मिलेगी। यह सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी होगा और सीधे IRCTC की वेबसाइट या ऐप पर यात्रियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
रेलवे की कार्यक्षमता में सुधार
यह तकनीक केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी। AI की मदद से रेलवे को यह समझने में आसानी होगी कि किस रूट पर और किस समय वेटिंग लिस्ट सबसे लंबी रहती है। इस डेटा का उपयोग करके रेलवे विभाग उन रूट्स पर विशेष ट्रेनें चलाने या अतिरिक्त कोच जोड़ने का निर्णय अधिक सटीकता से ले पाएगा। इससे रेलवे की सीटों का बेहतर प्रबंधन होगा और राजस्व (Revenue) में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
भारतीय रेलवे का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में वेटिंग लिस्ट की समस्या को पूरी तरह समाप्त करना है। 'मिशन जीरो वेटिंग लिस्ट' के तहत पटरियों के दोहरीकरण और नई ट्रेनों के साथ-साथ यह तकनीकी बदलाव रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। हालांकि, यह मॉडल अभी भी परीक्षण और विकास के दौर से गुजर रहा है, लेकिन इसके शुरुआती नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं। आने वाले समय में यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन को और अधिक विश्वसनीय और सुविधाजनक बना देगा।
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