AI Chip Boom: Tata-Micron नहीं, ये 3 देसी कंपनियां बन सकती हैं कमाई की मशीन
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Dec 24, 2025, 05:09 PM IST
AI and Semiconductor Stocks में जबरदस्त बूम देखने को मिल रहा है। हालांकि, अब तक निवेशकों की नजर सिर्फ Tata-Micron जैसे बड़े फैब प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों पर रही है। लेकिन, ग्रोथ की पूरी कहानी वैल्यू चेन में छिपी है। चिप बनाने में लगने वाले केमिकल्स, हाई-प्योरिटी गैस और खास मटीरियल्स वे कड़ी हैं, जिनके बिना AI चिप मैन्युफैक्चरिंग संभव नहीं। इसी सप्लाई-चेन से जुड़ी तीन कंपनियां AI चिप बूम की सबसे बड़ी लाभार्थी बन सकती हैं ।
10 लाख करोड़ का होगा मार्केट। (फोटो क्रेडिट, ओपन AI)
AI Chip Boom: भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। सरकारी अनुमान के मुताबिक 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार ₹10 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। अब तक चर्चा Tata-Micron जैसे बड़े फैब प्रोजेक्ट्स तक सीमित थी, लेकिन असली गेम चिप बनाने में लगने वाले केमिकल्स, गैस और मटीरियल में छिपा है। यही वजह है कि कुछ छोटी लेकिन खास भारतीय कंपनियां अब निवेशकों की नजर में आ रही हैं।
एक्युटास केमिकल्स
Acutaas Chemicals भारत की इकलौती कंपनी है जो सेमीकंडक्टर-ग्रेड फोटोरेजिस्ट केमिकल्स बनाती है। चिप फैब में इन केमिकल्स की शुद्धता बेहद अहम होती है, बिना इसके चिप बन ही नहीं सकती। कंपनी ने सेमीकंडक्टर सेगमेंट में एंट्री के लिए Baba Fine Chemicals में हिस्सेदारी खरीदी और अब साउथ कोरिया की कंपनी के साथ JV के जरिए ग्लोबल मार्केट में उतर रही है। फाइनेंशियल्स की बात करें तो H1 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 21% और मुनाफा 100% से ज्यादा बढ़ा।
आर्कीयन केमिकल्स
Archean Chemical Industriesअभी तक ब्रॉमिन और इंडस्ट्रियल सॉल्ट के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब कंपनी Silicon Carbide (SiC) चिप्स की दुनिया में कदम रख चुकी है। SiC चिप्स EV, रेलवे, डिफेंस और डेटा सेंटर के लिए बेहद जरूरी हैं। ओडिशा में कंपनी भारत का पहला कमर्शियल SiC फैब लगा रही है। हालांकि, इसमें भारी निवेश और मौसम पर निर्भर बिजनेस की वजह से जोखिम भी ज्यादा है। यानी यह हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड स्टॉक है।
स्टैलियन इंडिया
Stallion India Fluorochemicals असल में सेमीकंडक्टर फैब में इस्तेमाल होने वाली गैसें 99.9999% यानी 6N प्योरिटी की होती हैं। Stallion India इसी सेगमेंट में तेजी से एंट्री कर रही है। कंपनी लिक्विड हीलियम और हाई-प्योरिटी गैस प्रोसेसिंग पर फोकस कर रही है, जो AI और चिप मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद जरूरी है। H1 FY26 में Stallion का रेवेन्यू 50% से ज्यादा और मुनाफा 130% से ज्यादा बढ़ा है।
क्यों बनेंगे ग्रोथ के लाभार्थी?
कुल मिलाकर AI और सेमीकंडक्टर बूम में असली कमाई सिर्फ फैब लगाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहने वाली है। चिप मैन्युफैक्चरिंग के लिए जरूरी केमिकल्स, हाई-प्योरिटी गैस और एडवांस्ड मटीरियल सप्लाई करने वाली देसी कंपनियां सप्लाई-चेन के उस हिस्से में हैं, जहां एंट्री बैरियर ऊंचा है, डिमांड लगातार बढ़ रही है और मार्जिन मजबूत हैं। जैसे-जैसे भारत में नए AI, EV और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स फैब्स शुरू होंगे, इन कंपनियों का बिजनेस ऑटोमैटिकली स्केल होगा। फिलहाल, Tata-Micron जैसे बड़े नाम सुर्खियां बटोर रहे हैं, लेकिन असली कमाई चिप सप्लाई-चेन में छिपी है। Acutaas, Archean और Stallion तीनों अपने-अपने सेगमेंट में ऐसे काम कर रही हैं, जहां एंट्री मुश्किल है और मार्जिन मजबूत। AI और सेमीकंडक्टर बूम में ये तीनों स्टॉक्स आने वाले सालों में निवेशकों के लिए बड़े ट्रेंड बन सकते हैं।
डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
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