Top Defense Stock: भारत के डिफेंस सेक्टर में जब भी चर्चा होती है, फोकस आमतौर पर HAL और BEL जैसे दिग्गजों पर टिक जाता है। लेकिन इसी शोर के बीच एक ऐसी कंपनी है, जिसने चुपचाप इस सेक्टर में अपनी खास जगह बना ली है। यह कंपनी हथियार बनाने की होड़ में नहीं है। बल्कि, भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखकर देश की सेना को डिजिटल वारफेयर के लिए तैयार होने में मदद कर रही है। असल में यह कहानी है Zen Technologies की, जिसने लड़ाई के मैदान में उतरने से पहले सैनिकों को लड़ना सिखाने की टेक्नोलॉजी पर दांव लगाया है।
ट्रेनिंग को अहमियत
Zen Technologies की शुरुआत उस दौर में हुई, जब सिमुलेशन, वर्चुअल ट्रेनिंग और डिजिटल ड्रिल्स को ‘एक्सपेरिमेंट’ माना जाता था। हैदराबाद की एक सीमित फैसिलिटी में कंपनी ने वेपन सिमुलेटर, फायरिंग रेंज सॉल्यूशंस और ट्रेनिंग सिस्टम्स पर काम शुरू किया। उस समय न बड़े ऑर्डर थे, न ही कोई सुर्खियां। लेकिन, अब वक्त के साथ युद्ध का स्वरूप बदला। सेनाओं को समझ आया कि असली जंग में की गई गलती सबसे महंगी पड़ती है। यहीं, Zen की वर्षों पुरानी तैयारी काम आई।
भारतीय सेना का शिफ्ट बना टर्निंग पॉइंट
FY21–FY22 के आसपास भारतीय सेना ने फिजिकल ड्रिल्स के साथ-साथ सिमुलेशन बेस्ड ट्रेनिंग को औपचारिक रूप से अपनाना शुरू किया। यूनिफाइड फायरिंग रेंज और वर्चुअल बैटल रेडीनेस मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा बने। Zen उन गिनी-चुनी कंपनियों में है, जो इस बदलाव के लिए पहले से तैयार है। इसका नतीजा कंपनी के
फाइनेंशियल्स में सीधा दिखा है। कई साल तक 150–200 करोड़ रुपये के दायरे में रहने वाला कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में 440 करोड़ रुपये पार कर गया और FY 2025 में करीब 974 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
सिमुलेशन से आगे, अब कॉम्बैट इंटेलिजेंस पर जोर
Zen अब सिर्फ ट्रेनिंग कंपनी नहीं रही। बल्कि, यह भारत के रक्षा बलों के लिए डिजिटल वारफेयर के मामले में रीढ़ बन गई है। कंपनी ने बीते कुछ वर्षों में एंटी-ड्रोन सिस्टम्स, ऑटोनॉमस थ्रेट डिटेक्शन और कॉम्बैट रेडीनेस प्लेटफॉर्म्स में एंट्री की है। ड्रोन थ्रेट जैसे-जैसे बॉर्डर और स्ट्रैटेजिक इंस्टॉलेशंस के लिए असली खतरा बने, Zen के काउंटर-ड्रोन सॉल्यूशंस की डिमांड तेजी से बढ़ी। इस बदलाव ने बिजनेस की क्वालिटी भी बदली। हार्डवेयर-हेवी ऑर्डर्स की जगह सॉफ्टवेयर और इंटीग्रेटेड सिस्टम्स आए, जिससे मार्जिन्स में मजबूत उछाल देखने को मिला।
फाइनेंशियल्स ने भी पकड़ी रफ्तार
वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 974 करोड़ रुपये रहा, जबकि दो साल पहले यह लगभग 219 करोड़ रुपये था। मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी ने एक्सेप्शनल आइटम्स को हटाकर 174 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 61 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इसके अलावा कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 33 से 42% के दायरे में पहुंच चुका है। वहीं, डेट-टू-इक्विटी महज 0.01 है, जो डिफेंस टेक कंपनी के लिहाज से बेहद मजबूत बैलेंस शीट दिखाता है। जबकि, ROCE करीब 37% और तीन साल का एवरेज ROE लगभग 26% है। जबकि, इसी अवधि में कंपनी का प्रॉफिट 400% CAGR से बढ़ा है। जबकि, स्टॉक ने करीब 90% CAGR का रिटर्न दिया है।
मार्केट ने देर से पहचाना असली बिजनेस
Zen की री-रेटिंग अचानक नहीं हुई है। कंपनी ने पहले रेवेन्यू क्वालिटी सुधारी, फिर ऑपरेटिंग लेवरेज दिखाया और आखिर में डिफेंस प्रायोरिटीज में बदलाव का फायदा मिला। आज यह स्टॉक करीब 49x P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो इंडस्ट्री एवरेज से नीचे है। इस तरह जब बाकी कंपनियां हथियार बना रही थीं, Zen Tech सैनिकों की तैयारी पर काम कर रही थी।
अभी इस ऑर्डर से फोकस में आया शेयर
Zen Technologies को दिसंबर में ही रक्षा मंत्रालय से करीब 120 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह भारतीय सेना के लिए Comprehensive Training Node और एडवांस्ड सिमुलेटर सिस्टम्स से जुड़ा है। कंपनी को इसका एग्जीक्यूशन लगभग एक साल में करना है। इसके अलावा इस साल कंपनी को 108 करोड़ का सिमुलेटर सप्लाई ऑर्डर और करीब 289 करोड़ के एंटी-ड्रोन सिस्टम अपग्रेड कॉन्ट्रैक्ट भी मिल चुका है। इन ऑर्डर्स से साफ है कि फिलहाल कंपनी का मुख्य फोकस मिलिट्री ट्रेनिंग सिमुलेशन और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर है, जो न सिर्फ मजबूत ऑर्डर बुक देता है बल्कि आने वाले क्वार्टर्स में रेवेन्यू विजिबिलिटी और मार्जिन सपोर्ट भी बनाता है।

एचएएल और बीईएल की तुलना में बेहतर रिटर्न दे रही कंपनी। (फोटो क्रेडिट, गूगल फाइनेंस)
